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26/11 का हमला सुनियोजित था

Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
Gurgaon
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गुड़गांव। 26/11 की आतंकी घटना पूर्व सुनियोजित थी, जिसमें घातक हथियारों, कार-जैकिंग, ड्राइव-बाई शूटिंग और पूर्व निर्मित आईईडी का इस्तेमाल किया गया था। इसमें लोगों को बंधक बनाया गया और लक्ष्य बनाकर हत्याएं की गईं। आतंकवादियाें ने दस हमलावरों को समुद्री मार्ग से भेजकर एक सुनियोजित हमला कर सभी को हैरान कर दिया। मुंबई का आतंकवादी हमला अपने दुस्साहस, ऑपरेशनल उद्देश्यों, कियान्वयन की जटिलता और लक्ष्यों की विविधता की दृष्टि से चौंकाने वाला था। यह कहना है मुंबई हमले के दौरान आतंकियों को ढेर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के एक उच्चाधिकारी का।
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इन चुनौतियों के बावजूद ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के बाद एनएसजी के स्पेशल रेंजरों के समूह (एसआरजी) की जांबाजी और हुनरमंदी का अविस्मरणीय प्रदर्शन मुंबई हमले के दौरान ही देखने को मिला था। इस ऑपरेशन के दौरान घायल होने वाले पटौदी स्थित सफेदा के सुनील यादव कहते हैं कि पहली बार वे और उनके साथी इतनी कठिन परिस्थितियों से दो-चार हुए थे, लेकिन जल्द ही हालात पर काबू पाते हुए आतंकियों को ढेर कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद मुंबई की जनता ने एनएसजी के तमाम कमांडो को अपने कंधों पर उठाया लिया था। वो घड़ी आज भी जेहन में कैद है। इसके साथ ही एनएसजी के सामने चुनौतियों का पहाड़ भी निरंतर बड़ा हो रहा है। ‘दा ब्लैक कैट’ नामक इस सुरक्षा एजेंसी की वार्षिक पत्रिका में मेजर एडीए चंद्रा कहते हैं कि देश में नक्सलवाद एवं आतंकवाद का दायरा निरंतर बढ़ रहा है।
बड़े हमले से निपटने की तैयारी
एनएसजी का मानना है कि 26/11 की घटना से साबित होता है कि आतंकवादी संगठन एक कार्य शृंखला और रणनीति बनाकर हमला करने की क्षमता हासिल कर चुके हैं। इसके डीजी सुभाष जोशी का कहना है कि इन चुनौतियों को ध्वस्त करने की खातिर एक पंचवर्षीय योजना तैयार की गई है। इसके तहत अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई), यूनाइटेड स्टेट्स स्पेशल ऑपरेशन (यूएसएसओ) सहित फ्रांस, इजराइल और जर्मनी से आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण प्राप्त करने की प्रक्रिया शरू हो गई है। योजना सिरे चढ़ी तो ब्लैक कैट से चर्चित एनएसजी के जवान जीपीएस, कंपैक्ट कंप्यूटर, ऑटोमेटिक कैमरे और आधुनिक हथियारों से पूरी तरह लैस नजर आएंगे।
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एनएसजी-ब्लैक कैट पर नजर

इस फेडरल सुरक्षा एजेंसी का गठन : 1984 में
एजेंसी की क्षमता : 14, 500 अधिकारी और जवान
एनएसजी में शामिल हैं: अर्द्धसैनिक बल, पुलिस सेवा एवं सेना के जवान और अधिकारी
उद्देश्य: आतंकी गतिविधियों को ध्वस्त करना, अतिविशिष्ट लोगों की सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा, बंधकों को छुड़ाना, विस्फोटों और तोड़फोड़ की जांच
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एक दशक की उपलब्धियां
हथियार बरामद :131
विस्फोटक बरामद :100 किलो से ज्यादा
आतंकी ढेर किए :106
आतंकियों को समर्पण कराया : 339
बंधक छुड़ाए : 625

एनएसजी के प्रमुख ऑपरेशन
29-30 अप्रैल 1986 को स्वर्ण मंदिर ऑपरेशन
10-20 मई 1986 स्वर्ण मंदिर ऑपरेशन का दूसरा चरण
03-06 नवंबर 1988 को मालदीव में तख्ता पलट को विफल किया
10 नवंबर 1990 को कोलकाता के एयरबस में बंधक बनाई गई बर्मी छात्रा को मुक्त कराया
अक्तूबर 2002 में गुजरात के अक्षरधाम मंदिर को दो आतंकियाें को ढेर कर मुक्त कराया
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