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अब गेस्ट टीचर्स का भी मार्किंग से इंकार

Tue, 12 Nov 2013 07:03 PM IST
झज्जर/ब्यूरो
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की अतिथि अध्यापकों और निजी स्कूलों से मार्किंग की योजना भी असफल रही। प्राईवेट स्कूलों के शिक्षक तो मार्किंग केंद्र पर पहुंचे ही नहीं, जबकि झज्जर क्षेत्र के स्कूलों के अतिथि प्राध्यापकों ने बोर्ड की दोहरी नीति के विरोध में मार्किंग करने से इंकार कर दिया। जिला शिक्षा अधिकारी ने अतिथि अध्यापकों से मार्किंग करने की अपील की, मगर इसका असर नहीं हुआ।
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बोर्ड द्वारा सभी डीईओ को पत्र जारी कर अतिथि प्राध्यापकों और निजी स्कूलों से मूल्यांकन कराने को कहा था। डीईओ साधु राम रोहिला ने अतिथि प्राध्यापकों को मंगलवार को झज्जर और बहादुरगढ़ केंद्रों पर पहुंचने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत झज्जर के विभिन्न स्कूलों के करीब एक सौ प्राध्यापक यहां पहुंचे।

इन अतिथि शिक्षकों ने एक बैठक की। अतिथि अध्यापक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष और जिलाध्यक्ष मुकेश पूनिया ने मूल्यांकन पर चर्चा की। सभी शिक्षकों ने इस बात का मुद्दा उठाया कि कुछ दिन पूर्व दस जमा दो की परीक्षा में ही अतिथि अध्यापकों को ड्यूटी से यह कहकर हटा दिया गया गया था कि वे गेस्ट हैं।
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अब जब हसला ने मार्किंग का बहिष्कार किया तो बोर्ड को गेस्ट टीचर्स याद आ गए। सभी शिक्षकों ने इसे बोर्ड की दोहरी पॉलिसी बताया और यह मांग की कि बोर्ड उनके साथ सौतेला व्यवहार करना बंद करे। अतिथि अध्यापकों की ओर से जिला प्रधान मुकेश पूनिया, प्रदेश उपाध्यक्ष रणबीर सुहाग ने डीईओ को अवगत कराया कि अतिथि प्राध्यापक बोर्ड की दोहरी पॉलिसी के विरोध में मार्किंग नहीं करेंगे। बोर्ड उनका हसला के खिलाफ केवल हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। जबकि बोर्ड को नियमित शिक्षकों की तरह से ही उन्हें परीक्षा और मार्किंग में शामिल करना चाहिए। जिला शिक्षा अधिकारी एसआर रोहिला ने अतिथि अध्यापकों से मार्किंग करने को कहा, मगर शिक्षकों ने उनकी बात नहीं मानी।

हसला अध्यक्ष ने जताया आभार
अतिथि प्राध्यापकों को मार्किंग पर बुलाए जाने के बावजूद मार्किंग शुरू नहीं करने पर हसला के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह ने अतिथि अध्यापक संघ का आभार जताया है। हसला अध्यक्ष कप्तान सिंह के अलावा महेंद्र सिंह यादव ने हसला की मांगों को जायज बताया और कहा कि सरकार उनको केवल बरगलाने का काम कर रही है। उन्होंने भी मांग की कि बोर्ड व सरकार दोनों को अतिथि अध्यापकों के साथ सौतेला व्यवहार बंद करना चाहिए। अतिथि अध्यापकों को नियमित करने की मांग को जायज बताते हुए हसला पदाधिकारियों ने कहा कि बोर्ड को सभी के साथ एक जैसा व्यवहार करना चाहिए ।

कई स्कूल प्रमुखों ने की मनमानी
जिला शिक्षा अधिकारी एसआर रोहिला के निर्देश को कई स्कूल प्रमुखों ने गंभीरता से नहीं लिया और अपने यहां से अतिथि प्राध्यापकों को मूल्यांकन केंद्र पर नहीं भेजा। डीईओ ने करीब एक दर्जन ऐसे स्कूलों की सूची बनाई है जिन्होंने निर्देश के बाद भी मूल्यांकन के लिए अतिथि प्राध्यापकों को नहीं भेजा।
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