जिले में कुत्ते के काटे जाने वाले रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। पिछले तीन माह में 1750 व्यक्ति पागल कुत्ते के काटे जाने का इलाज करवाने के लिए जिला अस्पताल में आ चुके हैं। सरकार ने रैबीज के इलाज को मुख्यमंत्री की मुफ्त उपचार योजना से बाहर रखा है।
पागल कुत्ते के काटे जाने पर एंटी रैबीज नामक टीके लगाए जाते हैं। इन टीकों पर सरकार की तरफ से 200 रुपये प्रति टीका सब्सिडी दी जाती है। बाजार में इसके टीके के लिए 300 रुपये से अधिक की कीमत अदा करनी पड़ती है, जबकि सरकारी अस्पताल में 100 रुपये फीस ली जाती है।
जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार अक्तूबर माह में 569, नवंबर में 493 और दिसंबर में 688 व्यक्ति रैबीज बीमारी (कुत्ते के काटने) के उपचार के लिए जिला अस्पताल आ चुके हैं। सर्दी में पागल कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
यहां यह भी गौरतलब है कि बीते दिनों गांव दीघौट निवासी हरीचन्द की पत्नी फूलवती की पागल कुत्ते के काटने से मौत हो गई थी। मौत को लेकर पांच बच्चों को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल लाया गया। फूलवती के बच्चों को उल्टी की शिकायत हो गई थी।