हरियाणा के नारनौल के सिविल अस्पताल में स्टाफ एवं मूलभूत सुविधाओं की कमी मरीजों के साथ-साथ तामीरदारों पर भारी पड़ रही है।
जच्चा-बच्चा वार्ड दोनों कमियों से जूझ रहा है। प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने पर जच्चा-बच्चा को जान से भी हाथ धोने पड़ जाते हैं।
जच्चा-बच्चा वार्ड की नवजात शिशु नर्सरी में उपकरणों के अभाव में हर रोज पांच से सात शिशुओं को दूसरे अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
अस्पताल के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जच्चा-बच्चा वार्ड में स्टाफ के अलावा शिशु नर्सरी में पर्याप्त उपकरणों की कमी से अंडरवेट या प्री-मेच्योर डिलीवरी के की मामलों को रेफर करना पड़ता है।
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स्वास्थ्य मंत्री का गृह क्षेत्र ही उपेक्षित
स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह के गृह क्षेत्र के जिला स्तरीय अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ स्टाफ की कमी के चलते गंभीर मरीजों, डिलीवरी और नवजात शिशुओं को इलाज करवाने के लिए प्राइवेट अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
स्टाफ की कमी के चलते 2013 में अब तक 60 से अधिक नवजात शिशुओं और पांच महिलाओं की डिलीवरी के दौरान मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सामान्य अस्पताल नारनौल में प्रति माह करीब छह सौ बच्चे पैदा होते हैं, जिनमें से अनेक मामले गंभीर होते हैं।
चिकित्सकों कमी भी आ रही है आड़े
एक सौ बेड वाले नारनौल के सामान्य अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 42 पद स्वीकृत हैं। इनमें से मात्र 24 चिकित्सक कार्यरत हैं।
इनमें दो सीनियर मेडिकल अधिकारी, चार महिला चिकित्सक और दो डेंटल सर्जन शामिल हैं।
सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 600 से 650 ओपीडी होती है, लेकिन अस्पताल में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक महिला चिकित्सक मैटरनिटी लीव पर हैं।