फतेहाबाद। जिस संतान को पालने-पोसने में माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी लगा देते हैं उसी से उपेक्षा मिलने पर कई बुजुर्गों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। फतेहाबाद की ट्रिब्यूनल अदालतों में सबसे अधिक मामले ऐसे ही पहुंच रहे हैं जहां बुजुर्ग अपने बच्चों से देखभाल और भरण-पोषण का अधिकार मांग रहे हैं।
जिले की चार ट्रिब्यूनल अदालतों में पिछले पांच वर्षों के दौरान 559 मामलों की सुनवाई हुई है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की हैं जिनमें बुजुर्गों ने अपने ही बच्चों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। जिले की ट्रिब्यूनल अदालतों में माता-पिता या अभिभावकों की ओर से बच्चों की उचित देखभाल नहीं किए जाने से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मामलों में न केवल वृद्धि हुई है, बल्कि अदालतों पर लंबित मामलों का दबाव भी बना रहा।
हालांकि वर्ष 2025-26 में सुनवाई और निपटारे की रफ्तार तेज होने से लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। जिले में कुल चार ट्रिब्यूनल कोर्ट संचालित हैं। इनमें तीन अदालतें एसडीएम स्तर पर तथा एक अदालत उपायुक्त स्तर पर कार्य करती है। इन अदालतों में बच्चों की देखभाल, भरण-पोषण और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती है।
एक बेटा होने पर आ रही दिक्कतें : इसके अलावा कई मामलों में ऐसा भी हो रहा है कि माता-पिता का सिर्फ एक बच्चा होता है जो बाहर अपने काम के लिए रह रहा है और अब कोई भी उनका सहारा नहीं बन रहा है। ऐसे भी काफी मामले आते हैं। अगर बच्चा माता-पिता को साथ रखता है तो ठीक है नहीं तो कोर्ट की ओर से माता-पिता के पालन पोषण के लिए खर्चा देने का प्रावधान है अगर बच्चा वह नहीं भी देता है तो उसके बाद सजा का भी प्रावधान है।
बच्चों की ओर से देखभाल न करने के मामले सबसे ज्यादा : न्यायालय में सबसे ज्यादा मामले बच्चों के द्वारा उनकी देखभाल न करने के हैं। कई मामले में ऐसा हुआ है कि माता-पिता की ओर से अपनी जमीन-जायादाद बच्चों काे देने के बाद वे उन्हें अपने साथ नहीं रख रहे हैं। माता-पिता जिसके बाद अपनी देखभाल करवाने के लिए कोर्ट का सहारा ले रहे हैं। कोर्ट के सहारे पर काफी परिवार बस चुके हैं।
एक बेटा होने पर आ रही दिक्कतें
इसके अलावा कई मामलों में ऐसा भी हो रहा है कि माता-पिता का सिर्फ एक बच्चा होता है जो बाहर अपने काम के लिए रह रहा है और अब कोई भी उनका सहारा नहीं बन रहा है। ऐसे भी काफी मामले आते हैं। अगर बच्चा माता-पिता को साथ रखता है तो ठीक है नहीं तो कोर्ट की ओर से माता-पिता के पालन पोषण के लिए खर्चा देने का प्रावधान है अगर बच्चा वह नहीं भी देता है तो उसके बाद सजा का भी प्रावधान है।