लघु सचिवालय में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 7 जनवरी को सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन (सखी) लगाई गई। इस वेंडिंग मशीन से एक सप्ताह में नाम मात्र नैपकिन निकाले गए हैं। अंदाजा है कि पांच या छह नैपकिन ही निकले हैं। वे भी पहले दिन ट्रायल के दौरान निकाले गए थे। हालांकि, महिलाओं के सम्मान के लिए प्रशासन का यह अच्छा कदम है। मगर महिलाओं को यह मशीन रास नहीं आई। महिला एवं बाल विकास विभाग ने दावा किया है कि यह नैपकिन काफी सस्ती है। हकीकत यह है कि यह नैपकिन मार्केट रेट से सिर्फ एक रुपये सस्ता है। अच्छी कंपनी का एक सेनेटरी पैड मार्केट में 6 रुपये में मिलता है। इसके अलावा सबसे बड़ा झंझट पांच रुपये के सिक्के का रहता है। यदि किसी महिला को अचानक पैड की जरूरत पड़ जाए तो उसे पांच रुपये के सिक्के का जुगाड़ करना होगा। अन्यथा इस मशीन से पैड बाहर ही नहीं निकाली जा सकती।
बताया गया है कि सखी मशीन एक कंपनी ने प्रशासन को गिफ्ट की थी जो नैपकिन का बिजनेस करती है। मशीन की कीमत करीब 5 हजार रुपये है। उपायुक्त के आदेश पर यह मशीन महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय के समक्ष लगा दी गई ताकि कोई भी महिला इसका लाभ उठा सके। सार्वजनिक जगह पर मशीन लगी होने के कारण महिलाएं संकोच करती हैं। विभाग का कहना है कि यह मशीन लघु सचिवालय में काम करने वाली महिला कर्मियों के लिए वरदान है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के पास सुझाव आ रहे हैं कि ऐसी सुविधा कन्या स्कूल व महिला महाविद्यालय जैसे संस्थानों में होनी चाहिए। सबसे ज्यादा दिक्कत किशोरियों को होती है जिन्हें कई बार अचानक माहवारी की दिक्कत हो जाती है। ऐसे में उनके लिए स्कूल व कॉलेज से बाहर जाना मुश्किल हो जाता है।
इस मशीन से अभी तक ज्यादा नैपकिन नहीं निकाले गए और न ही यह मशीन किसी बिक्री के उद्देश्य से लगाई गई है। सखी मशीन महिलाओं के सम्मान में लगाई गई है। हमारी कोशिश रहेगी कि पैड पांच रुपये से भी सस्ती हो। इसके अलावा स्कूलों व कॉलेज में मशीन लगाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। -राजबाला, कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।