नशे की दलदल में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए सरकार कई दावे कर रही है। जागरूकता पर मोटा बजट खर्च किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बया कर रही है। जिले में नशा का सेवन कम नहीं हुआ है और न ही तस्करी कम हुई है। नशे के मरीज बढ़ते ही जा रहे है और लॉकडाउन के बावजूद लोगों को आसानी से नशा मिल रहा है। यहां तक की महिलाएं भी नशा तस्करी में लिप्त हैं। इस वर्ष नशा तस्करी करते करीब सात महिलाएं पकड़ी गई हैं। तो वहीं लोगों को नशा छोड़ने का रास्ता भी नहीं मिल रहा है। जिला मुख्यालय में वर्ष 2018 में बनाया गया नशा मुक्ति केंद्र कोरोना की भेंट चढ़ चुका है।
डेढ़ साल जिला मुख्यालय में नशा मुक्ति केंद्र बंद पड़ा है। जानकर हैरानी होगी कि जब नशा मुक्ति केंद्र शुरू हुआ तो डेढ़ साल में यहां पर 991 मरीज दाखिल करके उपचार किया गया लेकिन अब पिछले डेढ़ साल में नशा मुक्ति केंद्र बंद होने से एक भी मरीज दाखिल नहीं किया गया है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक हजार नशा छोड़ने वाले मरीजों को जगह नहीं मिल पाई है। हालांकि मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना 20 से 25 मरीज नशा छोड़ने के लिए पहुंच रहे हैं।
तीन सालों में 10 से ज्यादा मौतें
नशा की ओवरडोज कई युवाओं की जान ले चुका है। पिछले तीन सालों में 10 से ज्यादा मौतें हो चुकी है। नशे के कारण मरने वालों की उम्र 20 से 30 साल के बीच रही है। हाल ही में गांव भिरड़ाना में नशे की ओवरडोज से युवक की जान चली गई थी। अब यहां पर लोगों को जागरूक करने के लिए ग्रामीण खुद अभियान चला रहे हैं।
इस साल कितने मामले आए
मामले दर्ज हुए : 122
गिरफ्तार नशा तस्कर : 203
इस साल पकड़ा गया नशा
नशा मात्रा
अफीम 10.25 किलो
चूरापोस्त 364.780 किलो
गांजा 231.19 किलो
हेरोइन 1 किलो 578 ग्राम
अफीम पौधे 2200
नशे की गोलियां 39734
सिरप 123
नशा छुड़वाने के लिए ये पहुंचे मरीज
वर्ष ओपीडी में पहुंचे दाखिल हुए
मई 2018 से दिसंबर 2020 तक 9702 991
जनवरी 2021 से मई 2021 तक 554 0
नशा तस्करी के लिए महिलाओं को किया जा रहा आगे:
नशा तस्करी के लिए मुख्य सप्लायर महिलाओं को आगे कर रहे हैं। नशा की तस्करी करने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। महिलाओं से हेरोइन, चूरापोस्त की सप्लाई करवा रहे हैं।
कोट
नशा की चपेट में सबसे ज्यादा युवा पीढ़ी आ रही है। इसके पीछे मुख्य कारण संगति है। दोस्तों के बीच बैठकर ही नशा करना सीखता है और फिर वह बढ़ता चला जाता है। अभिभावक अपने बच्चों का खासकर ध्यान रखें कि वह जिन लोगों से मिल रहा है वह गलत संगत के लोग तो नहीं है। दूसरी बात नशा की लत को आसानी से छोड़ा जा सकता है सिर्फ आत्मविश्वास होना चाहिए।
- डॉ. गिरीश, मनोरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।
कोट
नशा तस्करी को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है। नशा पकड़ने के लिए स्पेशल टीम गठित की गई है। इसके अलावा कोई भी नशा तस्करी को लेकर गुप्त सूचना विभाग को दे सकता है। पुलिस विभाग की तरफ से नशा रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे है।
- राजेश कुमार, पुलिस अधीक्षक।