फतेहाबाद। नरमे की फसल पिछले चार सालों में लगातार घाटे का कारण बन रही है जिससे किसान अब गन्ने की खेती की ओर अग्रसर हैं। गुलाबी सुंडी, बेमौसमी बारिश और वर्षा में असमानता ने नरमे की पैदावार को प्रभावित किया है। जिले में नरमे का रकबा पिछले चार वर्षों में 60 हजार हेक्टेयर तक घट गया है। इससे किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं और गन्ने की खेती में संभावनाएं तलाश रहे हैं।
इस वर्ष गन्ने का रकबा 2000 हेक्टेयर से बढ़कर 3000 हेक्टेयर होने का अनुमान है। इससे जिले की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। गन्ने की रोपाई मुख्य रूप से तीन चरणों में होती है। पहला चरण सितंबर से अक्टूबर, दूसरा मार्च से अप्रैल और तीसरा चरण मई के अंत तक होता है। वर्तमान में गन्ने की रोपाई का अंतिम चरण चल रहा है, जिसे सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।
नरमे की फसल पिछले चार सालों में किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई है। 2021-22 में बारिश की कमी के कारण फसल सूख गई, 2022-23 में अधिक वर्षा से पैदावार नष्ट हो गई। 2023-24 में गुलाबी सुंडी और 2024-25 में बेमौसमी बारिश ने उत्पादन को और कम कर दिया। इन परिस्थितियों से नरमे की प्रति एकड़ पैदावार केवल दो से चार क्विंटल तक रह गई।
गन्ने के बीच की दूरी चार फीट से अधिक रखें
गन्ना की रोपाई करते समय दो लाइनों के बीच की क्यारी की दूरी चार फीट से ज्यादा रखना चाहिए। इससे गन्ने की मोटाई लंबाई बढ़ती है जिससे पैदावार बढ़ती है। गन्ने की प्रति एकड़ की पैदावार 400 क्विंटल तक होती है। यदि किसान अधिक फसल के लालच में कम दूरी पर गन्ने लगाते है तो फसल पर बीमारी का प्रकोप की होने की आशंका अधिक रहती है।
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सीओएच 119 किस्म बनी किसानों की पहली पसंद
जिले में गन्ने की फसल की कई किस्मों की रोपाई की जाती है। सबसे अधिक सीओएच 119 लोकप्रिय होकर उभरी है। इस विशेष किस्म की बुवाई के प्रति किसानों का रुझान अधिक है कि यह जिले के जिन क्षेत्रों में जलभराव या सेम की समस्या है वहां यह किस्म बेहद कामयाब साबित हुई है। यह किस्म नमकीन और हल्के खारे पानी में भी अपनी वृद्धि की गति कम नहीं होने देती जिससे सिंचाई की समस्या कम हो जाती है। कम समय में पक कर तैयार होने के कारण किसान अगली फसल के लिए खेत जल्दी खाली कर पाते हैं। इस किस्म का जूस हल्का हरा होता है, जो दिखने में ताजा और आकर्षक लगता है। स्वाद और रंग के कारण गन्ने के रस का व्यापार करने वालों के बीच इसकी मांग सबसे अधिक रहती है।
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जिले में पिछले चार सालों में कपास का रकबा
साल-2021-22- 1,50,000
साल-2022-23-1,09,414
साल- 2023-24-79,590
साल- 2024-25-90,630
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:: गन्ने की फसल पर प्राकृतिक आपदा जैसे ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और गर्मी सर्दी का कम असर रहता है। ऐसे में किसान गन्ने की रोपाई पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वहीं किसानों से अपील है कि वे गन्ने की रोपाई करने से पहले गन्ना विशेषज्ञों से सलाह लें।
- डॉ. रामेश्वर श्योकंद, गन्ना विकास अधिकारी, फतेहाबाद।