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पारा पहुंचा सात डिग्री, शीतलहर ने छुड़ाई कंपकंपी

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कंबल से खुद को ढांक कर अपने गंतव्य पर जाता बाइक सवार । - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। धनु संक्रांति लगते ही जिले में शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है। सोमवार को बर्फीली हवाएं चलने से लोग घरों में कैद होकर रह गए और सारा दिन धूप के दर्शन तक नहीं हुए। सोमवार को फतेहाबाद में अधिकतम तापमान 16.9 और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गेहूं की फसल को हालांकि इस ठंड से फायदा बताया गया है, लेकिन अगर तापमान गिरा और पाला पड़ने लगा तो सब्जियों को नुकसान की आशंका है। संभावित पाले को देखते हुए सब्जी उत्पादक किसानों ने अपनी सब्जियों को प्लास्टिक चादरों से ढकना शुरू कर दिया है।
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फतेहाबाद में सोमवार का दिन सबसे ठंडा रहा। पारा काफी नीचे लुढ़क आया है, जिससे कंपकंपी के साथ-साथ लोगों की दिनचर्या पर खासा असर पड़ा है। सोमवार को शीतलहर चलने के कारण लोगों ने घरों में ही घुसे रहना वाजिब समझा। बाजारों में भी रौनक गायब रही और लोग ठंड से बचने के लिए अलावा का सहारा लेते रहे। हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिन जिलेभर में धुंध का प्रकोप रहेगा तथा ठंड और बढ़ सकती है। कई इलाकों में पाला पड़ने की भी संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वह गेहूं के खेतों में सिंचाई करें तथा सरसों पर विशेष निगाह रखें, क्योंकि चेपा बीमारी लगने की पूरी संभावना है।
गेहूं की फसल को फायदा, सब्जियों को हो सकता है नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह ठंड गेहूं के लिए काफी लाभदायक है। कृषि विभाग के उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण ने बताया कि जिले में पड़ रही ठंड गेहूं के लिए वरदान मानी जा सकती है। उन्होंने बताया कि जिले में 1 लाख 89 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की गई है। उन्होंने कहा कि अगर पाला पड़ता है तो सरसों की फसल के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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टमाटर की फसल तैयार होने में हो सकती है देरी
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कुलदीप श्योराण के अनुसार, अगर थोड़ी भी ठंड बढ़ती है तो आलू की फसल खराब हो सकती है। इसके अलावा टमाटर की फसल पकने में देरी हो सकती है। मालूम हो कि फतेहाबाद में ढाणी माजरा, अहरवां, भरपूर तथा रतिया बेल्ट में आलू की बहुतायत मात्रा में फसल की बिजाई की जाती है। मिर्च की फसल को भी पाले से नुकसान होता है। जिला बागवानी अधिकारी डॉ. कुलदीप श्योराण के अनुसार, 4 डिग्री से नीचे पारा गिरता है तो उसके बाद पाला पड़ना आरंभ हो जाता है। 5 डिग्री तापमान में हवाएं चलने से अगली सुबह पाला पड़ने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि इस समय जिले में अमरूद की फसल भी खराब हो सकती है। उन्होंने बताया कि हाल ही में बिजाई की गई मिर्च उत्पादक किसानों ने फसल को पाले से बचाने के लिए प्लास्टिक की चादरों से ढकना शुरू कर दिया है।
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