फतेहाबाद। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के जलघरों की हालत ठीक नहीं है। इससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की किल्लत हाे रही है। जिले के कई गांवों में जलघर का टैंक छोटा होने के कारण पानी का भंडारण कम हो पा रहा है। इससे नहर बंद होने के बाद मात्र एक सप्ताह में ही पेयजल की किल्लत हाे जाती है।
जिले के गांव भिरड़ाना, किरढ़ान, करनौली, भोडिया खेड़ा आदि गांवों में जलघर की व्यवस्था ठीक नहीं है। जिले के लगभग सभी गांवों की नहरों में महीने में 15 दिन ही पानी रहता है। इसके बाद ग्रामीणों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ती है।
गांव ढिंगसरा के ग्रामीणों रोहताश, भाल सिंह, रमेश, अरुण, सोनू और दीपक कुमार आदि ने बताया कि गांव में जलघर का निर्माण करीब 40 वर्ष पहले हुआ था। पुराना होने के कारण अब इस जलघर का जलाशय जर्जर हो गया है। इस कारण इनमें पानी अधिक समय तक नहीं ठहर पा रहा है। ग्रामीणों को समय पर पूरी तरह से पेयजल की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कई बार दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है।
इससे बचने के लिए ग्रामीणों को मजबूरी में पानी का टैंकर खरीद अपना काम चलाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस समस्या के जल्द समाधान की मांग की है ताकि लोगों को परेशानी न हो सके।
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बूस्टिंग स्टेशन बनाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू
गांव करनौली में जलघर न होने से ग्रामीणों को नहरी पेयजल की किल्लत को झेलना पड़ रहा है। इस गांव में जलघर नहीं बनाया गया है। ग्रामीणों को दूसरे गांव के जलघर से आपूर्ति दी जा रही है। इससे गांव में पेयजल की पूर्ति पूरी नहीं हो रही है। हालांकि पिछले दिनों में गांव में बूस्टिंग स्टेशन बनाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
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गांव भोडिया खेड़ा में किया जाए जलाशय का निर्माण
गांव भोडिया खेड़ा के ग्रामीण सज्जन, दौलतराम, बीरबल और रवि आदि ने बताया कि गांव में जल घर की डिग्गी करीब 40 वर्ष पुरानी है, जिसकी क्षमता आबादी के अनुसार कम है। गांव में जलघर की डिग्गी की मरम्मत नहीं की गई है। जल घर की नई डिग्गी बनने से ग्रामीणों को पेयजल की समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन प्रशासन ऐसा नहीं कर रहा है। इसके लिए सर्वसम्मति से चुनी गईं सरपंच कौशल्या देवी के प्रतिनिधि अनिल गढ़वाल ने बताया कि जलघर के जलाशय का निर्माण जरूरी है।
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गांव मेहूवाला के ग्रामीण अश्वनी, साधुराम, विक्रम, जगदीश ने बताया कि गांव में बिना फिल्टर वाले पेयजल की आपूर्ति हो रही है। इस कारण ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है। प्रदूषित पानी पीने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन इसे स्वच्छ पेयजल की मांग की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे लोगों में गुस्सा है।