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जिला परिषद के निवर्तमान चेयरमैन की पत्नी का वार्ड हुआ बीसी-ए के लिए आरक्षित

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जिला परिषद के निवर्तमान चेयरमैन राजेश कस्वां की पत्नी सुनीता कस्वां का वार्ड नंबर तीन इस बार बीसी-ए वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। पिछली बार यह वार्ड सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित था। पिछले चुनाव में निवर्तमान चेयरमैन राजेश कस्वां और उनकी पत्नी सुनीता दोनों अलग-अलग वार्ड से चुनाव जीतकर पार्षद बने थे। बुधवार को लघु सचिवालय के जिला सभागार में डीसी महावीर कौशिक की अध्यक्षता में जिला परिषद के वार्डों के आरक्षण का ड्रा निकाला गया। गांव मताना निवासी बच्ची खनक के हाथों दोनों वार्डों से संबंधित पर्ची निकलवाई गई।
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गौरतलब है कि जिले में जिला परिषद के कुल 18 वार्ड हैं। इनमें से पिछली बार सात वार्डों से महिला पार्षद चुनी गई थीं जबकि 11 वार्डों से पुरुष पार्षद चुने गए थे।
जिला परिषद के वार्ड नंबर 13 से पिछली बार विजेंद्र सिवाच पार्षद चुने गए थे मगर इस बार यह वार्ड बीसी-ए की महिला के लिए आरक्षित हो गया है। विजेंद्र सिवाच जिला परिषद की बैठकों में पूरे तेवर के साथ नजर आते थे लेकिन इस बार उनके वार्ड से महिला पार्षद ही प्रतिनिधित्व करेंगी। खास बात यह है कि जिला बनने के बाद पहली बार ऐसा होगा कि वार्ड नंबर 13 से सामान्य वर्ग का पार्षद नहीं बन पाएगा। अब तक हर बार सामान्य वर्ग से ही पार्षद चुने जाते रहे हैं।
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सरकार के आदेशों के मुताबिक इस बार जिला परिषद में महिलाओं का पुरुषों के बराबर दबदबा रहेगा। पिछली बार 18 में से सात महिला पार्षद थी, लेकिन इस बार 9 महिलाओं को पार्षद बनने का अवसर मिलेगा। मतदाताओं को उम्मीद है कि बराबर संख्या में महिला पार्षद महिलाओं के हकों की आवाज जिला परिषद में बुलंद करने का काम करेंगी।
प्रदेश सरकार की हिदायतों के अनुसार अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति की महिलाओं व सामान्य जाति की महिलाओं की सीटों का निर्धारण घोषित कर दिया है। 18 वार्डों में से वार्ड नंबर 8, 9, 10, 16, 17 व 18 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इन अनुसूचित जाति के आरक्षित वार्डों में से वार्ड नंबर 9, 16 व 18 अनुसूचित जाति की महिला तथा वार्ड नंबर 8, 10 और 17 अनुसूचित जाति (ओपन) के लिए निर्धारित हुए हैं। आरक्षित वार्डों के निर्धारण के बाद इन्हें सम-विषम क्रमांक दिया गया। उसी के तहत महिला और ओपन का निर्धारण किया गया है। जिला परिषद के शेष सामान्य 12 वार्डों को भी सम-विषम क्रमांक में से दो वार्डों को पिछड़ी जाति वर्ग-ए के लिए आरक्षित करने के लिए ड्रा निकाला गया।
सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक जिला परिषद के चुनाव में पुरुषों के लिए आरक्षित वार्ड में महिलाएं नहीं लड़ सकेंगी। इससे पहले सामान्य वर्ग के लिए ओपन वार्ड में पुरुषों के अलावा महिला भी चुनाव लड़ सकती थीं मगर इस बार यह प्रावधान खत्म कर दिया गया है। महिलाओं के लिए 50 फीसदी वार्ड आरक्षित करके बाकी 50 फीसदी वार्ड पुरुषों के लिए निर्धारित किए हैं।
यह रहेगी स्थिति
वार्ड नंबर एक - सामान्य वर्ग
वार्ड नंबर दो - सामान्य वर्ग (महिला)
वार्ड नंबर तीन - बीसी-ए (ओपन)
वार्ड नंबर चार - सामान्य वर्ग (महिला)
वार्ड नंबर पांच - सामान्य वर्ग
वार्ड नंबर छह - सामान्य वर्ग (महिला)
वार्ड नंबर सात - सामान्य वर्ग
वार्ड नंबर आठ - अनुसूचित जाति (ओपन)
वार्ड नंबर नौ - अनुसूचित जाति (महिला)
वार्ड नंबर 10 - अनुसूचित जाति (ओपन)
वार्ड नंबर 11 - सामान्य वर्ग (महिला)
वार्ड नंबर 12 - सामान्य वर्ग
वार्ड नंबर 13 - बीसी-ए (महिला)
वार्ड नंबर 14 - सामान्य वर्ग
वार्ड नंबर 15 - सामान्य वर्ग (महिला)
वार्ड नंबर 16 - अनुसूचित जाति (महिला)
वार्ड नंबर 17 - अनुसूचित जाति (ओपन)
वार्ड नंबर 18 - अनुसूचित जाति (महिला)
हरियाणा पंचायती राज (निर्वाचन) नियम-1984 के नियम 5(1)(2) में किए गए प्रावधान के अनुसार जिला परिषद के वार्डों का आरक्षण किया गया है। वार्ड 3 और वार्ड 13 बीसी-ए के लिए आरक्षित हुए हैं। -अजय चोपड़ा, सीईओ, जिला परिषद।
हमें इस बात की खुशी है कि पहली बार वार्ड नंबर 13 से बीसी-ए वर्ग को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। हर वर्ग को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना चाहिए। जो भी नया पार्षद बनेगा, उसका हम विकास में पूरा सहयोग करेंगे। -विजेंद्र सिवाच, पूर्व जिला पार्षद, वार्ड 13
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