रूस से ताबूत में पहुंचे विजय के शव को श्मशान घाट लेकर जाते लोग।
फतेहाबाद। आठ लाख रुपये का कर्ज लेकर बिजनेस वीजा पर रूस गए गांव कुम्हारिया के विजय पूनिया (25) की भी यूक्रेन सीमा पर युद्ध के दौरान मौत हो गई। अप्रैल में ही गांव के दो युवकों की मौत से ग्रामीण गम में डूबे हैं। इससे पहले 4 अप्रैल को अंकित का शव आया था।
मंगलवार शाम साढ़े 5 बजे दिल्ली स्थित रूसी दूतावास से सूचना मिलने के बाद परिजन बुधवार को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। बुधवार को विजय के शव का गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
विजय जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। इससे पहले रूस गए गांव के ही युवक अंकित जांगड़ा की भी मौत हो गई थी और 4 अप्रैल को उसका शव घर लाया गया। अंकित और विजय की परिजनों से 13 सितंबर 2025 को आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद से परिवार के लोग दोनों की भारत वापसी के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
पिता का हो चुका है निधन : विजय लोन लेकर विदेश गया था ताकि वहां कमाई कर परिवार की जरूरतों को पूरा कर सके। पिता का कुछ साल पहले निधन हो चुका है। परिवार में सिर्फ मां माया और छोटा भाई सुनील है। सुनील पढ़ रहा है। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी विजय पर ही थी। चचेरे भाई ओमप्रकाश ने बताया उन्हें चार माह पहले विजय की मां का डीएनए सैंपल रूस मंगवाया गया था। तभी से अनहोनी का अंदेशा हो गया था कि विजय की यूक्रेन के साथ युद्ध में मौत हो गई है।
परिजन बोले-नौकरी का झांसा देकर जाल में फंसाया : चचेरे भाई ओमप्रकाश ने बताया विजय पहली बार जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। वीजा अवधि नहीं बढ़ी तो एक महीने बाद वापस आ गया। इसके बाद अक्तूबर 2024 में फिर गया और 6 महीने रहकर मार्च 2025 में वापस आ गया। 15 जुलाई 2025 को विजय एक साल का बिजनेस वीजा लगवाकर फिर रूस गया। वहां उसे नौकरी का झांसा देकर एजेंटों ने जबरन रूसी सेना में भर्ती करा दिया। रूसी सेना ने उसे यूक्रेन युद्ध में धकेल दिया।