फतेहाबाद। कैटल फ्री शहर का दावा अब सिर्फ कागजी रह गया है। मुख्य सड़क से लेकर सेक्टर तक की सड़कों पर लावारिस पशुओं के झुंड काल बनकर घूम रहे हैं। शहर में लावारिस पशुओं की तादाद कई दिनों से बढ़ने लगी है। जहां जिले के मुखिया डीसी और शहरों के मुखिया जिला नगर आयुक्त बैठते हैं, उस लघु सचिवालय के आसपास भी लावारिस पशुओं की भरमार है।
शहर के बाहरी क्षेत्र में बसी कॉलोनियों की तो हर गली में पशु घूमते नजर आते हैं। इन पशुओं से सहमे हुए शहरवासी बच्चों को गलियों में खेलने तक नहीं भेज रहे। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मानें तो इस समय शहर में दो हजार से अधिक लावारिस पशु अलग-अलग इलाकों में घूम रहे हैं। गौरतलब है कि फरवरी 2017 को जिला स्ट्रे कैटल फ्री घोषित किया गया था। उसके बाद दो बार और लावारिस पशुओं को गोशालाओं व नंदीशालाओं में पहुंचाने का प्रशासन ने दावा किया। वहीं शहर में एक नंदीशाला भी बनी हुई है। नंदीशाला को नगर परिषद प्रशासन हर महीने एक लाख रुपये से ज्यादा राशि भी देता है। मगर अब प्रशासन इसमें व्यवस्थाओं को लेकर सुध नहीं ले रहा है। यहां कभी नंदियों की संख्या क्षमता से अधिक हो जाती है।
पिछले 15 दिन में हो चुके छह लोग चोटिल
शहर में लावारिस पशुओं के हालात ऐसे हैं कि पिछले 15 दिन में ही छह लोग चोटिल हो चुके हैं। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई। हालांकि, इन चोटों का जिक्र प्रशासन तक नहीं पहुंचा। चौधरी कॉलोनी निवासी सुमन रानी ने बताया कि वह अपनी बच्ची को स्कूल छोड़ने जा रही थी, उसी समय पशुओं का झुंड गली में आ गया। उनको देखकर एक पशु उनकी तरफ दौड़ा, वह भागने लगी तो फिसल कर गिर गई। तभी किसी अन्य राहगीर ने पशुओं को वहां से भगाया।
पहले भी हो चुके कई हादसे
लावारिस पशुओं के कारण फतेहाबाद में कई हादसे हो चुके हैं। पांच साल पहले गांव चिंदड़ के युवक की लावारिस पशु के सामने आने के कारण मौत हो गई थी। तीन साल पहले फतेहाबाद के सिरसा रोड पर दो युवकों की बाइक भी पशुओं से टकराने से दोनों की मौत हो गई थी। जुलाई 2022 में हिसार रोड पर एक कार सड़क पर घूम रही दो बछड़ियों से टकरा गई थी। हादसे में कार सवार बाल-बाल बच गए थे।
गांवों से शहर की ओर आते हैं पशुओं के झुंड, सुध नहीं ले रहा प्रशासन
लावारिस पशु पहले जीटी रोड पर हुआ करते थे, लेकिन अब यह समस्या शहर के प्रत्येक बाजार से लेकर गलियों तक तक फैल गई है। सुबह से लेकर रात तक ये गलियों व सड़कों पर मंडराते रहते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
-रवि नागपाल, निवासी, लाजपत नगर
लावारिस पशु गालियों में घूमते रहते हैं, जिस कारण बच्चों को घरों से बाहर भी नहीं जाने देते। पता नहीं कब पशु बच्चों पर हमला कर दे, इसलिए बच्चों को घर में ही रखना पड़ता है। पशुओं के झुंड गलियों में आते रहते हैं और आपस में लड़ते भी रहते हैं।
-पूनम ग्रोवर, निवासी, सुंदर नगर
लावारिस पशुओं की समस्या दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। फिलहाल अभी तक इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह गंभीर मामला है क्योंकि ये सीधा लोगों की जान से जुड़ा हुआ मसला है। पशुओं को पकड़ने और बाद में उन्हें संभालने का कोई ठोस ब्लू प्रिंट तैयार होना चाहिए।
-संदीप सोनी, निवासी, पुरानी तहसील चौक
शहर में मात्र एक नंदीशाला है और इसमें अनेक नंदी हैं। ऐसे में नगर परिषद को चाहिए कि वह एक और नंदीशाला बनाए, ताकि उनको वहां पर रखा जा सके। साथ ही नंदियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाना चाहिए।
-लखविंद्र सिंह, निवासी, शास्त्री नगर
कोट
शहर में लगातार लावारिस पशुओं को पकड़ने का काम चलता रहता है। कई लोग ऐसे होते हैं, जो अपने घर में रखे हुए बीमार व बूढ़े पशुओं को छोड़ देते हैं, जो शहर में आ जाते हैं।
-ऋषिकेश चौधरी, ईओ, नगर परिषद फतेहाबाद