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Fatehabad News: रूस-यूक्रेन सीमा पर फंसे दोनों युवकों का परिवार से संपर्क टूटा

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रूस में फंसे गांव कुम्हारिया के युवाओ का परिवार जानकारी देते हुए स्त्रोत सोशल मीडिया
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फतेहाबाद। रूसी सेना में जबरन भर्ती किए गए दोनों युवक अंकित और विजय कुमार का परिवार से संपर्क टूट गया है। दोनों युवकों ने रात करीब 12 बजे टेलीग्राम के जरिये अपने भाइयों के मोबाइल नंबर पर वाइस मैसेज भेजा। दोनों ने वाइस मैसेज के जरिये कहा कि ठीक है भाई सुबह पांच बजे युद्ध में ले जाएंगे... बचा लो। वहीं, विदेश मंत्रालय ने परिवार के सदस्यों को ई-मेल भेजकर बताया है कि रूस में भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। दोनों के सुरक्षित वतन वापसी के लिए प्रयास जारी है।
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रूस-यूक्रेन सीमा पर फंसे गांव कुम्हारिया के अंकित जांगड़ा (23) ने भाई रघुबीर और और विजय (25) ने भाई सुनील को वाइस मैसेज भेजा है। मैसेज में लिखा है कि मुझे शक है कि वीडियो वायरल हो रही है। अब आगे से देख लेना, मेरा फोन नहीं लगेगा। रूसी सेना ने सोशल मीडिया एप वीरवार को ही दोनों से डिलीट करवा दी थी। परिवार के सदस्यों की इस मैसेज के बाद चिंता बढ़ गई है। अंकित की मां सुशीला और विजय की मां मायादेवी सदमे में हैं। दोनों बेटों की याद में बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। परिवार के सदस्य भोजन भी नहीं कर रहे।
मां सदमे में है और बार-बार बेटे का नाम ले रही है।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों को जबरन युद्ध के मैदान में धकेलने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, वीरवार को ही परिवार दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मिलकर आए हैं। रघुबीर ने बताया कि विदेश मंत्रालय की तरफ से ईमेल पर ये ही जवाब आया है कि रूस में भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। रघुवीर ने बताया कि दोनों युवकों के अब सुरक्षित वतन वापसी का इंतजार है।
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वीडियो कॉल करके बताया तो सेना की वर्दी में थे :
गांव कुम्हारिया के अंकित जांगड़ा (23) और विजय पूनिया (25) रूस गए थे। अंकित के भाई रघुवीर ने बताया कि सोमवार को अंकित की कॉल आई थी। उसके साथ तब विजय भी था। अंकित ने कहा, हमें बचा लो। हमारे पास एक दो दिन ही बचे हैं। इसके बाद हमें युद्ध में भेज दिया जाएगा।
रमेश बोला, लालच देकर रूसी सेना में किया जा रहा भर्ती
गांव कुम्हारिया निवासी रमेश कुमार भी मार्च 2024 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। मॉस्को के कॉलेज में दाखिला ले लिया। कॉलेज में सप्ताह में दो दिन ही कक्षा लगती है और पार्ट टाइम काम करने की अनुमति है। अधिकतर छात्र वहां पर होटलों में हेल्पर का काम करते हैं या फिर कंस्ट्रक्शन का काम कर रहे हैं। उस दौरान गांव विजय भी साथ था। रमेश ने बताया कि वह मार्च में लौट आए और विजय जुलाई में दोबारा चला गया। रमेश ने बताया कि रूस में सेना में भर्ती करने के लिए गिरोह सक्रिय है। ट्रेनिंग के नाम पर युवाओं को लालच देकर सेना में भर्ती किया जा रहा है। सिर्फ 10 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद युद्ध के मैदान में छोड़ दिया जाता है।
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