बालिका वधु बनने से दो बहने बाल-बाल बचीं। गांव बुर्ज में 16 और 14 वर्षीय नाबालिग बहनों की बारात मंगलवार को अहरवां ढ़ाणी और लालौदा से आनी थी। इसके लिए घर में तैयारियां चल रही थी।
मंगल गीत भी गाए जा रहे थे। भोज के लिए हलवाई बैठे हुए थे। रिश्तेदार शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। किसी ने इसकी महिला सरंक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रेखा अग्रवाल को दे दी।
रेखा अग्रवाल ने गांव में पहुंचकर देखा कि दोनों की उम्र वास्तव में कम है। अधिकारी ने इसके लिए लड़कियों के पिता व दादा को रोका, लेकिन वह नहीं माने।
तब अधिकारी ने रतिया के एसडीजेएम की अदालत में स्टे के लिए याचिका डाली। अदालत ने तुरंत याचिका स्वीकार कर ली और स्टे ऑर्डर दे दिया। अधिकारी ने उसके पिता व दादा को पार्टी बना कर सम्मन थमा दिए।
तब दोनों ने लिखित रूप में माना कि लड़कियों के बालिग होने तक वह विवाह नहीं करेंगे।