मनीराम गोदारा ने उस समय भारत के ही हिस्से रहे लाहौर के डीएवी कॉलेज और शिमला के आरपीसीएसडी कॉलेज में छात्र नेता के रूप में अपनी राजनीतिक शुरुआत की थी। इसके बाद 1947 में देश आजाद होने के बाद सक्रिय राजनीति में आए और 1948 में कांग्रेस के सदस्य बन गए। 1950 में थाना कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने। 1962 से 64 तक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रहे। उन्होंने 1956 में फतेहाबाद विधानसभा का उपचुनाव लड़ा। इसके बाद इसी सीट से जीतकर 1957-62 तक संयुक्त पंजाब में एमएलए रहे।
फिर 1967-68 तक हरियाणा विधानसभा के लिए बड़ोपल सीट से चुने गए। वह 1967 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राव बीरेंद्र सिंह की सरकार में हरियााणा के सिंचाई एवं बिजली मंत्री बनाए गए। इसके बाद 1971 में हुए लोकसभा के चुनाव में उन्होंने हिसार सीट से चुनाव लड़ा और जीतकर संसद पहुंचे। वह पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के संस्थापक सदस्य भी रहे। 1996 से 1999 तक बंसीलाल सरकार में गृह मंत्री रहे। इस दौरान उनके पास जेल, पीडब्ल्यूडी बीऐंडआर, परिवहन, पर्यावरण जैसे विभाग भी रहे।
मनीराम गोदारा का जन्म गांव बड़ोपल में हुआ था। मगर बाद में उन्होंने गांव हड़ौली के पास 1200 एकड़ जमीन खरीदकर यहां गांव निमड़ी बसाया था। मनीराम गोदारा ने आचार्य विनोबा भावे के भू-दान आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया। उन्होंने विनोबा भावे के कहने पर गांव बड़ोपल, कुम्हारिया, साबरवास और निमड़ी में अपनी 150 एकड़ से ज्यादा जमीन दान कर दी थी। निमड़ी में 10 परिवारों को पांच-पांच एकड़ जमीन दान की थी। इसके अलावा उस समय चल रही मुजारा प्रथा को तुड़वाने में उनकी अहम भूमिका रही। मुजारों को भी जमीन का मालिकाना हक मिला।
मनीराम गोदारा बेबाक छवि के नेता था। उनकी हमेशा पूर्व उपप्रधानमंत्री स्व.चौधरी देवीलाल और पूर्व मुख्यमंत्री स्व.भजनलाल के साथ हमेशा राजनीतिक प्रतिद्वंदता रही। स्व.भजनलाल और गोदारा के एक ही समाज से होने के चलते कई बार जुबानी हमले करते रहते थे। हालांकि, कुछ समय के लिए चौधरी देवीलाल और उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला के साथ भी आए। मगर वह राजनीतिक दोस्ती लंबी नहीं चल पाई। साल 1999 में बंसीलाल सरकार जाने के बाद मनीराम गोदारा सक्रिय राजनीति से दूर हो गए। साल 2009 में उनका निधन हो गया।
स्व.मनीराम गोदारा के पौत्र सुधीर गोदारा पुराना किस्सा सुनाते हुए बताते हैं कि संयुक्त पंजाब के समय पंजाब का बुढलाडा क्षेत्र उनके पिता के विधानसभा क्षेत्र में आता था। चुनाव के दौरान उन्होंने लोगों की मांग पर वादा कर दिया कि घग्गर नदी पर पुल बनवा देंगे ताकि आवागमन सरल हो जाए। यह भी कह दिया कि अगर पुल नहीं बना तो वोट मांगने नहीं आऊंगा। मगर अगले चुनाव आने तक पुल नहीं बना। जब चुनाव लड़ने की बात आई तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों को मना कर दिया। कैरों ने कारण पूछा तो कहा कि मैं जुबान का धनी हूं और पुल का वादा पूरा नहीं हो सका। इस पर कैरों ने कहा कि पुल इतनी जल्दी नहीं बनता है। पलट कर गोदारा ने कहा कि पुल जल्दी नहीं बन सकता तो उद़्घाटन पत्थर तो लग सकता है। इसके बाद उद्घाटन पत्थर लगा और फिर मनीराम गोदारा ने चुनाव लड़ा।