फतेहाबाद। भगवान से संबंध बनाओ निभाना उनका काम है। जो भगवान की शरण में आ जाता है, भगवान उसको स्वयं संभालते हैं। यह बात हरिद्वार के भागवत मार्तंड स्वामी यमुनापुरी महाराज ने कही।
वह मोहल्ला रामनिवास में स्थित श्रीसनातन धर्म मंदिर में पंडित तुलसीदास रामानंद सरस्वती के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कृष्ण कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं दे रहे थे। समारोह में विनोद तायल बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे जबकि अध्यक्षता सत्यप्रकाश गुप्ता और राकेश बंसल ने की। कथा में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के वृतांत का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा बाल्यकाल में शिक्षा ग्रहण करने जाते थे।
एक दिन जब सुदामा ने गुरु जी को कहा कि आज उन्हें पाठ याद नहीं है तो गुरु जी ने सुदामा को जंगलों से लकड़ियां काटकर लाने का आदेश दिया। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने सोचा कि उनके मित्र को अकेले कोई दिक्कत न हो तो उन्होंने अपने मित्र की सहायता के लिए कहा कि मुझे भी पाठ याद नहीं है। ताकि लकड़ियां काटने में सुदामा की मदद कर सकें।
इस दौरान चने लेकर सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण जंगल में गए थे। तो भूख लगने के कारण सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के हिस्से के चने भी खा गए। भगवान के हिस्से के 40 दाने खाए तो सुदामा को 40 वर्ष तक दरिद्रता भोगनी पड़ी थी। इस अवसर पर कृष्ण झांब, पार्षद रमेश गिल्होत्रा, देसराज ठाकुर, कर्ण चराईपौत्रा, रामकुमार मंगल, चंद्र मेहता, रिया गंभीर, रेशमा नारंग, राकेश चौधरी, ललित गुप्ता, हंसराज असीजा बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
मंच संचालन राजकुमार मदान ने किया। समारोह में लख्मीचंद सरदाना, प्रवीण जिंदल, जगत रूखाया, बबलू जिंदल, डॉ. हंसराज कथूरिया, विजय बांगा, योगेश मेहता, ललित शुक्ला, निर्मल कथूरिया, हरीश कथूरिया, हरमीत मक्कड़, कृष्ण वधवा आदि मौजूद रहे।