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Fatehabad News: इस बार कोई नया गुल खिलाएगी फतेहाबाद शहर के 50 हजार मतदाताओं की चुप्पी

Tue, 07 May 2024 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद। लोकसभा चुनाव को लेकर शहरी मतदाता अभी शांत हैं। शहर में चुनाव की चकाचौंध से अभी शहरी मतदाता दूरी बनाए हुए हैं। चुनाव में शहर के वही लोग दौड़ लगा रहे हैं, जो किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। मगर आम मतदाताओं के बीच कोई ज्यादा उत्साह अभी नजर नहीं आ रहा है। माना जा रहा है कि चुनाव के बिल्कुल नजदीक आने पर शहरी मतदाताओं के रुख का पता चलेगा।
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हालांकि, अभी तक फतेहाबाद के औद्योगिक रूप से पिछड़ेपन को किसी भी सांसद द्वारा दूर नहीं करवा पाने का मतदाताओं में मलाल जरूर है। विश्वविद्यालय जैसे किसी बड़े संस्थान और जिला मुख्यालय को रेलवे लाइन से नहीं जोड़ पाने की टीस भी है। फतेहाबाद शहर में करीब 50 हजार मतदाता हैं। इस बार इन मतदाताओं की चुप्पी कोई नया राजनीतिक गुल खिलाने के मूड में भी लग रही है।

राष्ट्रीय से ज्यादा स्थानीय मुद्दों का समाधान चाह रहे शहरवासी
शहरवासियों का कहना है कि फतेहाबाद जिला सिरसा लोकसभा क्षेत्र में आता है, यहां से कई सांसद बने हैं, फिर भी फतेहाबाद जिले में विकास की गति धीमी ही रही है। जिले में बहुत कोशिशों के बाद सरकारी महाविद्यालय मंजूर हुआ है तो औद्योगिक क्षेत्र में आज भी जिला पिछड़े जिलों की सूची में शामिल है। राष्ट्रीय मुद्दों से ज्यादा शहरवासी स्थानीय मुद्दों का समाधान चाह रहे हैं। नगर परिषद में फैले भ्रष्टाचार से शहरवासी तंग हैं। प्रॉपर्टी आईडी और परिवार पहचान पत्र की त्रुटियों को ठीक करवाने के लिए भी उन्हें चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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सुनीता दुग्गल भी नहीं चलवा पाई रेल, मेडिकल कॉलेज भी टोहाना शिफ्ट हुआ
शहरी मतदाता हरदीप सिंह, विकास कुमार, प्रशांत शर्मा कहते हैं कि साल 2019 में पहली बार भारी बहुमत के साथ सिरसा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा का सांसद बना था। सरकारी नौकरी छोड़कर सांसद बनी सुनीता दुग्गल से लोगों को काफी उम्मीदें थी। मगर वह भी न रेल चलवा पाई और न ही कोई बड़ी इंडस्ट्री जिले में ला पाई। प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेज देने की घोषणा की तो शहर के लोगों को उम्मीद जगी कि अब शहर का मंदी का दौर ठीक होगा और काम-धंधे भी जोर पकड़ेंगे। मगर वह भी टोहाना के गांव रसूलपुर में शिफ्ट कर दिया गया। जिला मुख्यालय पर नए महाविद्यालय को मंजूर तो कर दिया है, लेकिन उसके भवन के लिए जगह तय नहीं हो पाई है। अभी भी उसकी कक्षाएं गांव भोडियाखेड़ा में लग रही हैं। बीडीपीओ कार्यालय में चल रहे पुस्तकालय में पढ़ने वाले युवाओं करूण, पूजा, सुनीता, मंजू और अनिल कुमार आदि ने बताया कि जिले में कई वर्षों से पुस्तकालय का भवन भी नहीं बन सका है।


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लोकसभा चुनाव की चर्चा तो हो रही है। मगर स्पष्ट कोई मतदाता नहीं बोल रहा है। मैं शहर के पपीहा पार्क में सुबह शाम घूमने आता हूं तो लोकसभा चुनाव की चर्चा जरूर होती है। लोग अब आपसी राजनीतिक बहसबाजी के बजाय मुद्दों की बातें ज्यादा करते हैं।

राजकुमार, निवासी, फतेहाबाद


शहर में चुनाव शांतिपूर्वक ही होते हैं। किसी भी प्रत्याशी से कोई निजी रंजिश नहीं रखता है। शहर में चुनाव के दिन जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, तभी कोई चुनावी रंग देखने को मिलेगा। फिलहाल तो मतदाताओं में शांति है। फतेहाबाद शहर को विकास की रफ्तार देने की बहुत जरूरत है।

आत्माराम, निवासी, फतेहाबाद
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शहर में अभी चुनाव प्रचार की शुरुआत ही हुई है। कई वर्षों के बाद लोकसभा के चुनाव में जोरदार मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस चुनाव में लोगों में जागरुकता भी आई है। हर मतदाता का मानना है कि प्रत्याशी ऐसा हो जो जिले में विकास कार्य करवाएं। रेलवे लाइन, मेडिकल कॉलेज, इंडस्ट्री जैसे कई मुद्दे हैं।

मदनलाल, निवासी, फतेहाबाद
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25 मई को हाेने वाले लोकसभा चुनाव में मैं एक ऐसे उम्मीदवार को मत करना चाहता हूं, जो जिले में नए रोजगार और उद्योगों को स्थापित करवाएं। चुनावी दिनों में अक्सर लोग भूल जाते हैं कि प्रत्याशी शहर का विकास करेगा या नहीं। जनता राष्ट्रीय मुद्दों से ज्यादा स्थानीय मुद्दों को समाधान मांग रही है।
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विनोद कुमार, निवासी, फतेहाबाद
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