फतेहाबाद। जिले में गर्मी बढ़ने के साथ पेयजल संकट भी गहरा गया है। कई गांवों और शहरी क्षेत्रों में नियमित पानी आपूर्ति नहीं होने से लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि बड़े गांवों में भी लोगों की दैनिक जरूरतें मुश्किल से पूरी हो रही हैं।
गांव भिरड़ाना में लोगों को एक से दो दिन बाद पानी मिल रहा है। बाहरी कॉलोनियों तक सप्लाई नहीं पहुंचने से परेशानी और बढ़ गई है। मजबूरी में लोग 800 से 1000 रुपये खर्च कर पानी के टैंकर मंगवा रहे हैं। गांव बहबलपुर में जलघर बनने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि आधे गांव तक पानी की सप्लाई ही नहीं पहुंच रही।
वहीं टोहाना की दमकौरा रोड कॉलोनी के निवासी पानी संकट से परेशान हैं। लोग सप्ताह में दो बार जाम लगाकर प्रशासन के खिलाफ रोष जता चुके हैं। जिले के 259 गांवों में से 145 गांवों तक नहरी पानी की सप्लाई पहुंच रही है, जबकि 114 गांवों के लोग अब भी ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग उठाई है ताकि गर्मी के दिनों में लोगों को राहत मिल सके।
-
महिलाएं बोलीं- ट्यूबवेल का पानी लाती हैं पर वह पीने लायक नहीं
गांव बहबलपुर में सात करोड़ की लागत से जलघर बनने के बाद भी करीब आधा गांव प्यासा है। महिलाएं आज भी मटके लेकर पानी के लिए भटक रही हैं। वजह यह है कि आधे गांव में पाइप लाइन नहीं बिछी है। गांव में चार एकड़ में बना जलघर जो की दो गावों थेहड़ी और बहबलपुर का सयुंक्त है। आधे गांव में पानी की समस्या बनी हुई है। पीने के पानी के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्रामीण जगदीश, रमेश, सीता, कांतो बाई, जसवीर आदि ने बताया की घरों में कई दिनों से जलघर का पानी पीने के लिए नहीं मिल रहा। दूर से पानी पीने के लिए लाते हैं। ट्यूबवेल का पानी पीने लायक नहीं है। सरपंच प्रतिनिधि गुरप्रीत सिंह ने बताया की पानी की समस्या तो है क्योंकि पाइप पूरे गांव में नहीं बिछाई गई है। जिसके कारण पानी की समस्या उत्पन्न हो रही है। समस्या जल्दी ही हल होने की उम्मीद है। अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
-
सांसद से पुकार फिर भी नहीं समाधान
गांव भिरड़ाना की आबादी 10 हजार से भी ज्यादा है और सबसे बड़े गांवों में शामिल है लेकिन यहां पानी की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ग्रामीण विजय, मनप्रीत का कहना है कि सांसद कुमारी सैलजा से गुहार लगा चुके हैं लेकिन स्थिति जस की तस है। ग्रामीण 800 से 1000 रुपये में टैंकर मंगवाने को मजबूर हो रहे हैं। वजह ये भी है कि गांव में जो जलघर बना है उसकी क्षमता कम है।
-
गर्मी में बढ़ जाती है मांग
टैंकर संचालक सुभाष का कहना है कि शहर के मुकाबले टैंकर के लिए गांवों से मांग ज्यादा है। तेल खर्च बढ़ने के साथ ही रेट भी बढ़ जाता है। 600 रुपये से टैंकर का खर्च शुरू हो जाता है जितनी दूर पहुंच करनी होती है रेट भी उसी के मुताबिक लिया जाता है।