फतेहाबाद। गांव मेहूवाला की करीब 60 ढाणियों में पिछले डेढ़ माह से नहरी पेयजल आपूर्ति नहीं हो रहा है। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग मजबूरी में ट्यूबवेल का खारा पानी पीने को विवश हैं। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को कई बार शिकायतें देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया है।
गांव के मुख्य जलघर से ढाणियों तक पेयजल पहुंचाने के लिए अलग से पाइपलाइन बिछाई गई है ताकि दूर-दराज की ढाणियों में रहने वाले लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। पिछले लगभग डेढ़ माह से इन पाइपलाइन में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इसके चलते ढाणी में रहने वाले परिवारों के सामने पेयजल संकट गहरा गया है।
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खारा पीने को मजबूर हैं लोग
ढाणीवासियों का कहना है कि नहरी पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद उन्हें ट्यूबवेल के खारे पानी पीना पड़ रहा है। इस पानी का टीडीएस 3000 हजार से अधिक है। बावजूद उसके कोई अन्य विकल्प नहीं होने से वे इसका उपयोग कर रहे हैं। खारे पानी के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका बनी हुई है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीण रवि, सुरेश और विजेंद्र ने बताया कि पेयजल की समस्या को लेकर कई बार जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभाग की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
ढाणियों में नहरी पेयजल आपूर्ति बहाल न होने के कारण भीषण गर्मी के मौसम में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रहना बेहद कठिन है। जल्द इस समस्या का समाधान होना चाहिए।
-रविंद्र, ग्रामीण।
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जनस्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि ढाणियों की पाइपलाइन में तत्काल पेयजल आपूर्ति शुरू करवाई जाए तथा समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
- मदनलाल, ग्रामीण।
गांव मेहूवाला में ट्यूबवेल का पानी पीने योग्य नहीं है। इस पानी के पीने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं आती है। नहरी पेयजल की सप्लाई नहीं होने के कारण लोगों टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
- कमलेश, ग्रामीण।
:: पिछले तीन-चार दिनों से खेतों में पाइपलाइन डालने का काम जारी है इससे ढाणियों की पेयजल की पाइपलाइन टूट गई है। जल्द ढाणियों के लिए पर्याप्त पेयजल आपूर्ति बहाल की जाएगी।
- मंदीप ओला, जेई जनस्वास्थ्य विभाग, भट्टू कलां।