फतेहाबाद। शिक्षा विभाग की ओर से दो साल पहले शुरू किए गए उल्लास कार्यक्रम का उद्देश्य जिले के 45 हजार निरक्षरों को साक्षर बनाना था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। सर्वे के दौरान विभाग सिर्फ 22 हजार निरक्षरों को ही चिन्हित कर पाया, जबकि मार्च माह तक मात्र 11 हजार ने ही परीक्षा दी। अब शेष बचे लोगों के लिए विभाग 28 सितंबर को परीक्षा आयोजित करने जा रहा है।
इस परीक्षा की तैयारियां तो शुरू हो गई हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि निरक्षरों को पढ़ाने के लिए किताबें ही उपलब्ध नहीं करवाई गईं। विभाग की ओर से सिर्फ पेन और कॉपियां देकर खानापूर्ति की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पाठ्य सामग्री की मांग की गई थी, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।
सरकारी स्कूलों में होगी परीक्षा :
28 सितंबर को होने वाली परीक्षा गांव के ही सरकारी स्कूलों में ली जाएगी। विभाग का अनुमान है कि पिछली बार परीक्षा देने वाले 11 हजार में से केवल करीब 5 हजार ही दोबारा परीक्षा में शामिल हो पाएंगे। परीक्षा में पास होने वालों को साक्षरता प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जिससे वे अब निरक्षर नहीं माने जाएंगे।
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जमीनी स्तर पर कई खामियां
शिक्षकों और कार्यक्रम से जुड़े सदस्यों का कहना है कि साक्षरता के इस अभियान में गंभीरता का अभाव है। जब पढ़ाने के लिए जरूरी किताबें ही नहीं होंगी, तो लक्ष्य कैसे पूरा होगा? कार्यक्रम में निरक्षरों की सही पहचान, नियमित कक्षाएं और उपयुक्त शिक्षण सामग्री की भारी कमी है।
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जिले में ये है स्थिति
निरक्षर ढूंढने का मिला लक्ष्य - 45027
निरक्षर ढूंढे गए - 22024
परीक्षा दी - 11624
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घर के सदस्य ही बनाए वीटी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की माने तो 15 साल से ऊपर के व्यक्ति जिन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता है, इनका सर्वे किया जा जा रहा है। इसमें 100 साल तक के बुजुर्ग भी शामिल हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए विभाग की तरफ से स्वयंसेवी शिक्षक लगाए हैं। ये स्वयंसेवी शिक्षक परिवार के सदस्य बनाए गए हैं जो कि पांचवीं कक्षा से ज्यादा पढ़े हैं। विभाग की तरफ से इन्हें कोई मानदेय नहीं दिया है। ये स्वयंसेवी होते हैं।
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शिक्षा विभाग की तरफ से उल्लास कार्यक्रम चल रहा है। इसके तहत जिले में 45 हजार निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य दिया गया है लेकिन अभी तक 22 हजार चिह्नित किए जा चुके हैं और 11 हजार परीक्षा दे चुके हैं। 28 सितंबर को परीक्षा होनी है इसमें पांच हजार से ज्यादा के शामिल होने की उम्मीद है।
- पवन सागर, जिला संयोजक, उल्लास कार्यक्रम