फतेहाबाद। जिले में मूंगफली की फसल की कटाई का काम शुरू हो चुका है। इससे अनाज मंडियों में मूंगफली की आवक कुछ ही दिनों में शुरू हो जाएगी। लेकिन सरकार की ओर से मूंगफली की फसल को एमएसपी (मिनिमम स्पोर्ट प्राइस) पर खरीद करने के लिए शेड्यूल जारी नहीं किया है। इससे मूंगफली उत्पादक किसान चिंतित हैं।
जिले के भट्टू खंड में मूंगफली की फसल की बुवाई काफी बड़े स्तर पर की जाती है। रेतीले क्षेत्र में मूंगफली की फसल मुनाफे का सौदा माना जाता है। इस फसल में कम पानी व खाद की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसान मूंगफली बुवाई तो कर रहे हैं लेकिन मंडियों में उचित भाव नहीं मिलने के कारण अब यह फसल घाटे का सौदा साबित हो रही है।
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किसानों को हो रहा है 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक का नुकसान
जिले में अगले सप्ताह से मूंगफली की कटाई शुरू हो जाएगी, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के लिए कोई शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। सरकार ने इस बार मूंगफली का एमएसपी 6700 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन अनाज मंडी में पिछले वर्ष की मूंगफली की फसल लेकर पहुंच रहे किसानों की फसल को निजी व्यापारी 4200 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद कर रहे हैं। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 2000 रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
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एमएसपी की 24 फसलों में शामिल है मूंगफली
जिले के किसान रामपाल, अशोक, नीम सिंह, सत्यनारायण, देवीलाल और करण आदि ने बताया कि अगर सरकार समय रहते एमएसपी पर खरीद शुरू नहीं करती है, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं सरकार की ओर से 24 फसलों पर एमएसपी की गांरटी दी गई है। लेकिन धरातल पर गेहूं, धान और सरसों की फसल की एमएसपी पर खरीद हो रही है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो करती है, लेकिन उनकी फसल का उचित दाम देने में विफल साबित हो रही है।
:: मूंगफली की फसल की एमएसपी पर खरीद करने को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। अगर ऐसी कोई सूचना होगी तो साझा की जाएगी।
निशांत, मार्केट कमेटी, सचिव भट्टू कलां।