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यूक्रेन के शहर से निकल कर खुद बॉर्डर तक पहुंचने की जिम्मेदारी भारतीयों पर

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फतेहाबाद। यूक्रेन में तीसरे दिन रूस के तेज होते हमले के कारण अब भारतीयों तक मदद पहुंचने में परेशानी बढ़ गई है। यूक्रेन के ओडेसा शहर में फंसी फतेहाबाद की रहने वाली छात्रा सुप्रिया और निशा ने बताया कि उनके पास मदद के लिए फोन आ रहे हैं लेकिन मदद यूक्रेन के साथ लगते देश रोमानिया, पोलैंड के बॉर्डर तक पहुंचने के बाद मिलने के लिए कहा गया है। ओडेसा शहर से निकलकर बॉर्डर तक जाने की जिम्मेदारी खुद भारतीयों पर छोड़ी जा रही है।
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युद्ध के हालात में रूस के हमलों से सबसे अधिक तबाही वाले शहरों में शामिल ओडेसा शहर से निकलकर बॉर्डर तक जाना तो दूर बाहर निकलकर जरूरी सामान तक लाना काफी मुश्किल है। ऐसे में छात्रा सुप्रिया और निशा ने अपने साथ ओडेसा शहर में फंसे दूसरे सभी भारतीय तक मदद पहुंचाने की मांग भारत सरकार से की है। फतेहाबाद में संपर्क करते हुए छात्रा सुप्रिया ने बताया है कि भारत सरकार यूक्रेन से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के प्रयास कर रही है लेकिन हमें मदद के लिए जो फोन आए हैं उसके अनुसार उन्हें खुद ही इस शहर से निकलने का इंतजाम खुद करना होगा। वहीं यहां से निकलकर किसी भी तरह तय बॉर्डर तक पहुंचने के लिए हमें कहा जा रहा है जो कि हमारे लिए मुश्किल है। फिलहाल रूस के हमलों से सबसे अधिक प्रभावित शहरों में फंसे दूसरे भारतीयों को भी मदद लेने में मुश्किलें आ रही हैं।
कम प्रभावित इलाकों में बस सेवा के जरिये बार्डर तक पहुंच रहे भारतीय
भारत सरकार द्वारा यूक्रेन की सीमा के साथ लगते देश पोलैंड, रोमानिया में भारतीय दूतावास को जिम्मेदारी सौंपी है कि यूक्रेन में मौजूद भारतीयों को इस देश तक किसी तरह लाया जाए और इन देशों से भारतीयों को एयरलिफ्ट किया जाएगा। इन दोनों देशों की सीमा से सटे शहरों और रूस के हमले में कम प्रभावित क्षेत्र से तो पैदल, बसों और दूसरे वाहनों के जरिये बॉर्डर तक भारतीयों का पहुंचना जारी है। लेकिन यूक्रेन में रूस की सीमा क्षेत्र पर मौजूद ओडेसा जैसे शहरों में जहां रूस के हमले भी अधिक हुए, वहां से भारतीयों को निकालना बड़ी चुनौती बन गया है।
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हेल्पलाइन नंबर के जरिये भारतीय लगातार कर रहे संपर्क
भारत सरकार और संबंधित दूतावास के हेल्पलाइन नंबर पर गंभीर परिस्थितियों में फंसे भारतीय लगातार संपर्क कर रहे हैं और किसी तरह से अपनी जगह छोड़कर बार्डर के लिए निकलने के प्रयास कर रहे हैं। गंभीर परिस्थितियों वाले शहरों से निकलने के लिए लगातार यूक्रेन में भारतीय स्थानीय स्तर पर हर संभव कोशिशों में लगे हैं।
परिवारों की चिंता बढ़ी, अंदर पहुंचकर मदद करने की मांग
यूक्रेन के अंदरूनी शहरों में जिन भारतीयों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है, उनके परिजनों की यहां चिंता बढ़ गई है। यूक्रेन के ओडेसा शहर में फंसी फतेहाबाद के गांव भूथनखुर्द की छात्रा सुप्रिया के पिता रूलीराम ने कहा कि हम बच्चों के साथ लगातार संपर्क में हैं, लेकिन हमारी भारत सरकार से मांग है कि किसी भी तरह से संभव करके गंभीर परिस्थिति वाले शहर में अंदर तक पहुंचकर मदद की जाए और बच्चों व सभी भारतीयों को सुरक्षित निकाला जाए।
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