टोहाना। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पूनिया चिट फंड घोटाले से जुड़े मामले में फैसला जिला मजिस्ट्रेट के संपत्तियां अटैच करने के आदेश को सही बताया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक अनुमति के संचालित चिट योजनाओं को कानूनी संरक्षण नहीं मिल सकता।
पीड़ितों के अधिवक्ता अंकित भालोटिया ने बताया कि यह याचिका करमबीर पूनिया व अन्य द्वारा दायर की गई थी। इसमें 4 नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत उनकी संपत्तियां हरियाणा प्रोटेक्शन ऑफ इंट्रेस्ट ऑफ डिपोजिटर्स इन फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2013 के तहत अटैच की गई थीं।
याचिकाकर्ताओं पर आरोप था कि उन्होंने लोगों से धन एकत्र कर एक चिटफंड स्कीम चलाई थी लेकिन बाद में निवेशकों को भुगतान नहीं किया। इसी के चलते उनकी संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बिना अनुमति चलाई जा रही चिटफंड योजनाएं कानून की परिभाषा में नहीं आती इसलिए उन्हें किसी प्रकार की राहत या कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा प्रोटेक्शन ऑफ इंट्रेस्ट ऑफ डिपोजिटर्स इन फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 2013, राष्ट्रपति की मंजूरी से लागू है और पूरी तरह वैध है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि उन्होंने जो पैसा लिया वह चिटफंड के रूप में था जिसे डिपॉजिट की परिभाषा से बाहर रखा गया है इसलिए 2013 के कानून के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चिट को कानूनी मान्यता तभी मिलेगी, जब वह चिट फंड्स एक्ट, 1982 के तहत विधिवत पंजीकृत हो और राज्य सरकार से पूर्व अनुमति ली गई होगी।