पुरानी रसीद बुक की राशि जमा होने से पहले जारी कर दी गई थी नई बुक
- ब्लड बैंक के एलटी ने जांच पर उठाए सवाल, स्वास्थ्य महानिदेशक को भेजी शिकायत
- जांच कमेटी ने एलटी को ठहराया है जिम्मेदार, रिकवरी के लिए जारी हो चुका है नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में पिछले 6 सालों में चार्ज राशि जमा करवाने को लेकर हुए गड़बड़झाला मामले में लैब तकनीशियन हरपाल सिंह ने कमेटी द्वारा की गई जांच पर सवाल उठाए है। हरपाल का आरोप है कि पुरानी रसीद बुक की राशि खाते में जमा करवाने से पहले ही नई रसीद बुक जारी कर दी गई।
हरपाल के अनुसार छह साल में 27 रसीद बुक जारी की गई हैं। मामले की दोबारा जांच करवाने को लेकर हरपाल सिंह ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखा है। बता दें कि कमेटी ने मामले में जांच के बाद एलटी हरपाल सिंह को जिम्मेदार ठहराया है और रिकवरी के लिए नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
शिकायत में एलटी हरपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि ब्लड बैंक में मौखिक तौर पर और बिना पत्राचार के ही काम हो रहा था। किसी भी कर्मचारी की लिखित में जिम्मेदारी नहीं लगाई गई। आरोप है कि ब्लड बैंक के संबंधित इंचार्ज और लेखा शाखा के अधिकारी जिम्मेदार हैं। हर साल 31 मार्च को खातों की क्लोजिंग होती है और हर तीन साल बाद ऑडिट होती है। लेकिन गड़बड़ी सामने आने के डर से मामले को दबाए रखा। अब मामला उजागर हुआ तो उसे साजिश के तहत फंसा दिया गया।
- ये है मामला
नागरिक अस्पताल प्रशासन को जुलाई माह में जब बजट की जरूरत पड़ी तो ब्लड बैंक का खाता संभाला गया, परंतु उसमें राशि नहीं मिली। संबंधित कर्मचारियों से जब सवाल-जवाब किए गए तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। 9 जुलाई 2024 को मामले की शिकायत तत्कालीन एसएमओ डॉ. सुभाष ने सिविल सर्जन को दी। सिविल सर्जन ने कमेटी का गठन किया। जिसमें उप सिविल सर्जन मेजर डॉ. शरद तुली, डॉ. गुंजन बंसल, लेखाकार अधिकारी रविंद्र को शामिल किया गया। कमेटी ने मामले में ब्लड बैंक के कर्मचारियों व 2019 से लेकर वर्ष 2024 तक के इंचार्ज के बयान दर्ज किए। कमेटी ने मामले में कुल 17 लोगों के बयान दर्ज किए। कमेटी ने रिकॉर्ड जांचा तो बिल बुक में से 12 रसीदों की नकल कॉपी ही गायब मिली। ब्लड बैंक को नवंबर 2018 से लेकर वर्ष 2024 तक 27 बिल बुक जारी हुई है। इसमें 12 रसीदें गायब मिलीं। ब्लड बैंक में सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीज के लिए ब्लड निशुल्क है। इसके अलावा अगर कोई निजी अस्पताल से मरीज आता है तो उससे 1100 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से चार्ज लिया जाता है। पहले ये चार्ज 1050 रुपये था।
- मामले में संबंधित कर्मचारी को नोटिस दिया जा चुका है और ब्लड बैंक इंचार्ज को भी पत्र लिखा गया है कि जो भी कानूनी कार्रवाई है वह की जाए। कर्मचारी के पास अगर कोई साक्ष्य थे या कोई भी बात थी कमेटी के सामने रखने चाहिए थे।
- डॉ. महेंद्र, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।