फतेहाबाद। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को सामान्य एक्सरे के लिए जिला नागरिक अस्पताल या शहर के अन्य अस्पतालों तक नहीं जाना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग गांव स्तर पर एक्सरे सुविधा आधुनिक बनाने की तैयारी कर रहा है। भट्टूकलां में डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) सिस्टम लगाया जा चुका है।
भूथनकलां और बड़ोपल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी एक्सरे मशीन के साथ डीआर सिस्टम स्थापित करने की तैयारी है। डीआर सिस्टम में एक्सरे की तस्वीर डिजिटल रूप में तैयार होती है। इससे फिल्म की जरूरत नहीं रहती और डॉक्टर को जांच की तस्वीर अधिक स्पष्ट मिलती है। रिपोर्ट तैयार करने में भी सुविधा रहती है।
हड्डियों में चोट, फ्रैक्चर, जोड़ों की परेशानी, सीने में संक्रमण और फेफड़ों से जुड़ी शिकायतों में एक्सरे की जरूरत पड़ती है। सांस लेने में दिक्कत और दुर्घटना के बाद चोट की जांच में भी एक्सरे उपयोगी होता है। फिलहाल जिले में रतिया, फतेहाबाद, भूना और जाखल में एक्सरे मशीनें संचालित हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को कई बार जांच के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नए डीआर सिस्टम शुरू होने से स्वास्थ्य केंद्रों पर ही एक्सरे की सुविधा मिल सकेगी। इससे मरीजों का समय और आने-जाने का खर्च बचेगा।
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सात रेडियोग्राफर, पांच पद हैं खाली
जिले में एक्सरे जांच के लिए रेडियोग्राफरों की कमी भी बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग के पास कुल सात रेडियोग्राफर कार्यरत हैं जबकि पांच पद अभी खाली हैं। ऐसे में नए केंद्रों पर डिजिटल एक्सरे सुविधा शुरू होने के साथ पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
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इन स्थितियों में जरूरी होता है एक्सरे
हड्डी में फ्रैक्चर या चोट, दुर्घटना के बाद अंदरूनी चोट का पता लगाने, लंबे समय से खांसी या सीने में संक्रमण की आशंका, सांस संबंधी परेशानी, फेफड़ों की बीमारी और कुछ जोड़ संबंधी समस्याओं की जांच के लिए डॉक्टर एक्सरे की सलाह देते हैं।
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भट्टूकलां में डिजिटल एक्सरे सुविधा शुरू हो रही है और अब जल्द बड़ोपल और भूथन कलां में होगी। रंगीन एक्सरे से मरीजों को फायदा मिलेगा। जिला मुख्यालय में भी एक्सरे मशीन को अपडेट किया जाना है।
- डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन