फतेहाबाद। एक तरफ सरकार खेलों को बढ़ावा देने के दावे करती है पर जमीनी हकीकत में यह पूरे होते दिखाई नहीं देते हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल भी प्रदेश सरकार की ओर से जिले को 48 खेल नर्सरियां दी गई हैं लेकिन एथलेटिक्स की नर्सरी में कटौती कर दी गई हैं। जिले में पिछले साल एथलेटिक्स की 10 नर्सरियां अलॉट की गई थी वहीं इस बार केवल 4 ही हैं।
जिले में इस बार गांव बनगांव, पारता, भिरड़ाना व तलवाड़ा को ही एथलेटिक्स की खेल नर्सरी मिली हैं। जिले में एथलेटिक्स की खेल नर्सरी कम होने के कारण इसका प्रभाव पहले की नर्सरियाें में खेल रहे खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। इस कारण अब उन्हें या तो अपना खेल को बदलना पड़ रहा है या दूसरी जगह पर प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।
खेल नर्सरी बंद होने के कारण खिलाड़ियों में काफी रोष है। ग्रामीण रामेश्वर, साधुराम, वकील कुमार, संजय आदि कहना है कि सरकार को खेल नीतियों में निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। यदि किसी गांव में एक बार खेल नर्सरी शुरू की जाती है तो वहां के खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे अचानक बंद नहीं किया जाना चाहिए। एथलेटिक्स ऐसा खेल है जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। बावजूद इसके इस खेल को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिल रही।
बनमंदोरी सहित कई जगह पर इस बार नहीं मिली नर्सरी
(कौन से गांव हटा दिए और किसमें मिली है नर्सरी ये सवाल पूछना है।)
पिछले साल जिले में पीलीमंदोरी, बनमंदोरी, ढांड, कन्हड़ी सहित 10 जगह पर खेल नर्सरी मिली थी। इस बार इन गांवों को हटाकर केवल चार गांवों को ही खेल नर्सरी अलॉट की गई हैं। इनमें बनगांव, पारता, भिरड़ाना व तलवाड़ा गांव में एथलेटिक्स की खेल नर्सरी मिली है। जिस कारण इन खिलाड़ियों को अब दूसरी जगह पर जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।
गांव में इस बार खेल नर्सरी नहीं मिलने से खिलाड़ियों को नुकसान हो रहा है। प्रदेश सरकार को खेल नर्सरी को फिर से अलॉट करना चाहिए। गांव के काफी खिलाड़ी पदक जीतकर आए थे। खेलों को बढ़ावा देने के लिए नर्सरियों को बढ़ावा देना जरूरी है।
- खिलाड़ी रोहित, निवासी ढांड।
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खेल नर्सरियां केवल प्रशिक्षण का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। यदि इनकी संख्या घटती रही तो इसका असर आने वाले वर्षों में जिले की खेल प्रतिभाओं पर भी दिखाई देगा।
- सतपाल पंवार, ग्रामीण निवासी पीलीमंदोरी।
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आवेदन करने के बाद खेल नर्सरी अलॉट करने का काम मुख्यालय की ओर से किया जाता है। जिला स्तर पर खेल नर्सरी अलॉट करने का कोई प्रावधान नहीं है।
- विष्णुदास, जिला खेल अधिकारी फतेहाबाद।