राजेश मेहूवाला
फतेहाबाद। ईरान और इस्राइल के बीच जारी युद्ध के 12 दिन बाद मंगलवार को सीजफायर की घोषणा से भारतीय राइस मिलरों को राहत मिली है।
इस युद्ध के कारण भारत का बासमती चावल निर्यात ईरान, इस्राइल और अन्य पश्चिम एशियाई देशों में प्रभावित हुआ था, जिससे बासमती चावल की कीमतों में लगभग 500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरावट दर्ज की गई थी।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है। वहीं देश के कुल चावल निर्यात में हरियाणा की भागीदारी करीब 40 फीसदी है। चावल के प्रमुख खरीदार देश सऊदी अरब और ईरान हैं। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण वर्तमान में तकरीबन ढाई लाख टन बासमती चावल भारतीय बंदरगाहों पर फंसा हुआ है।
यह चावल गुजरात के कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों पर पड़ा है। हालांकि अब दोनों देशों की ओर से सीजफायर की घोषणा हो गई है तो चावल व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि अगले दस दिनों में चावल के दाम में आई कमी को पूरा किया जा सकेगा, जिससे स्थिति में सुधार होगा।
फतेहाबाद शहर के प्रमुख राइस मिलर अजय जिंदल ने बताया कि हरियाणा से करीब 40 देशों में चावल का निर्यात होता है। पिछले 12 दिनों तक चले ईरान और इस्राइल के युद्ध के दौरान बासमती चावल की कीमत में 500 से 600 रुपये तक की गिरावट दर्ज हुई है, जो चावल प्रति क्विंटल 7200 से लेकर 7000 रुपये प्रति क्विंटल था, वह चावल अब 6600 तक पहुंच गया है। हालांकि अब सीजफायर हो गया है। इससे जल्द बासमती चावल की कीमत में तेजी आएगी और बंदरगाहों पर रुके चावल का निर्यात शुरू होगा। संवाद