फतेहाबाद। गांधीनगर आईआईटी के क्रिएटिव लर्निंग सेंटर में गणित और विज्ञान विषय के शिक्षकों को एक जून तक मास्टर ट्रेनिंग दी जानी है। इसको लेकर रविवार को शिक्षकों का दल गांधीनगर गुजरात के लिए रवाना हुआ। शनिवार रात को ही संबंधित शिक्षक मतदान की ड्यूटी से लौटे थे जो कि शुक्रवार से गए हुए थे और रविवार सुबह गुजरात के गांधीनगर के लिए रवाना हो गए। यहां पर शिक्षकों को 28 मई से एक जून तक ट्रेनिंग दी जाएगी।
जिले से डीएसएस मुकेश मेहता के नेतृत्व में 6 शिक्षक प्रशिक्षण के लिए गए हैं। जिसमें गणित और विज्ञान के शिक्षक शामिल हैं। गांधीनगर आईआईटी में ट्रेनिंग लेने के बाद वापस लौटकर शिक्षा विभाग बैच तैयार करेगा। ट्रेनिंग लेकर लौटे ट्रेनर यहां के शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। इसको लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय शेड्यूल तैयार करेगा। जिले में करीब 650 से 700 शिक्षक हैं।
गांधी नगर में ये शिक्षक लेंगे ट्रेनिंग
- मुकेश मेहता, जिला विज्ञान विशेषज्ञ।
- सोनिया, पीजीटी बायो, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पारता।
- रविकरण, पीजीटी फीजिक्स, पीएमश्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शेखुपुर दड़ोली।
- सुरेश, टीजीटी विज्ञान, राजकीय हाई स्कूल करनौली।
- सुरेश कुमार, पीजीटी गणित, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंगल।
- विजय कुमार, पीजीटी गणित, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल बोस्ती।
- अंजू गांधी, पीजीटी, राजकीय कन्या हाई स्कूल, बीघड़।
पहली बार विभाग दे रहा है गांधी नगर में प्रशिक्षण
शिक्षा विभाग पहली बार आईआईटी गांधीनगर में गणित और विज्ञान विषय को लेकर शिक्षकों को इतने बड़े स्तर पर ट्रेनिंग दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पढऩे और पढ़ाने के तरीके बदल रहे हैं। सिलेबस में पहले की तुलना में परिवर्तन हो चुका है। पुराने ढंग से पढ़ने को विद्यार्थी तैयार नहीं हैं। ये वजह है कि गणित और विज्ञान को लेकर विद्यार्थी रूचि कम दिखा रहे हैं। आईआईटी गांधीनगर में विशेषज्ञों द्वारा नए तरीके से प्रेक्टिकल के जरिए पढ़ाने का तरीका बताया जाएगा। एक्सपर्ट द्वारा बताया जाएगा कि किस तरह से आसान तरीकों से विद्यार्थियों को पढ़ाया जा सकता है और उनके मन से डर को निकाल सकते हैं।
कोट
गांधीनगर आईआईटी के लिए शिक्षकों का दल रवाना हो गया है। बुधवार से यहां पर शिक्षकों को नए तरीके से विज्ञान और गणित विषय पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। ये ट्रेनर शिक्षक यहां के शिक्षकों को पढ़ाने के गुर सिखाएंगे।
-मुकेश मेहता, जिला विज्ञान विशेषज्ञ