फतेहाबाद में घर पर तैयार की गई खाद की जानकारी देती सुमन।
फतेहाबाद। शहर की भाटिया कॉलोनी निवासी सुमन दो साल से रसोई से निकलने वाले कचरे का सदुपयोग कर घर पर ही जैविक खाद तैयार कर रही हैं। करीब 35 दिन में तैयार होने वाली इस खाद का इस्तेमाल वह अपने घर में उगाई जा रही सब्जियों और पौधों में करती हैं।
इससे एक ओर जहां रसोई के कचरे का निस्तारण हो रहा है वहीं दूसरी ओर परिवार को घर की उगाई ताजी और पौष्टिक सब्जियां भी मिल रही हैं। सुमन ने बताया कि करीब दो साल पहले उनके बच्चों ने उन्हें घर में जैविक खाद तैयार करने का आइडिया दिया था।
इसके बाद उन्होंने रसोई से निकलने वाले गीले कचरे को अलग रखना शुरू किया। शुरुआत में छोटे स्तर पर प्रयोग किया और धीरे-धीरे इसकी प्रक्रिया समझ में आने लगी। अब वह नियमित रूप से घर के जैविक कचरे से खाद तैयार करती हैं।
उन्होंने बताया कि सब्जियों और फलों के छिलके, बची हुई जैविक सामग्री तथा अन्य गलने-सड़ने वाले कचरे को अलग एकत्र किया जाता है। इसे उचित तरीके से रखने के बाद करीब 35 दिन में खाद तैयार हो जाती है। तैयार खाद को गमलों और घर के छोटे से बगीचे में लगे पौधों में डाला जाता है।
सुमन के अनुसार, घर में खाद तैयार करने से रसोई के कचरे को बाहर फेंकने की जरूरत कम हो गई है। इसके साथ ही पौधों को प्राकृतिक खाद मिलती है। वह घर में मौसम के अनुसार विभिन्न सब्जियां उगाती हैं और परिवार के भोजन में उनका इस्तेमाल करती हैं।
सुमन का कहना है कि यदि लोग अपने घरों में निकलने वाले गीले कचरे को अलग कर उसका सही तरीके से उपयोग करें तो कचरे की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।