बनगांव का राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय। यहां बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा जुबां पर लिए अंदर घुसने वाले व्यक्ति को इस नारे की खोखली हकीकत से सामना होना तय है। इस स्कूल की 115 बेटियां पढ़ना चाहती हैं, होशियार भी हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए एक भी अध्यापक नहीं है। जी हां, सही पढ़ा आपने, पूरे स्कूल में एक भी अध्यापक नहीं है। ऐसा नहीं है कि अफसरों को नहीं पता, उनको सब पता है, लेकिन सब बिजी है सरकार के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को लेकर कागज काले करने में। अब ग्रामीण तंग आकर दो कदम उठाने की धमकी दे रहे हैं, या तो बेटियों का स्कूल से नाम कटवा देंगे या फिर इस स्कूल को ही ताला जड़ देंगे। इन दोनों ही सूरतों में सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी का होगा तो वो इन 115 बेटियों का ही।
कई सालों से एक अध्यापिका के सहारे था स्कूल
ऐसा नहीं है कि बनगांव मिडिल स्कूल में अध्यापकों की समस्या कुछ नई है। सालों-साल से यही सिलसिला चलता आ रहा है। पिछले तीन साल से एक ही अध्यापिका पूरे स्कूल को संभालती थी, लेकिन जून महीने की शुरुआत में उस टीचर का भी यहां से तबादला हो गया और इसके बाद से इस स्कूल की 115 बेटियां खुद ही अपनी कक्षाओं में बैठकर पढने को मजबूर हैं। हालात यह हो गए हैं कि अब तो स्कूल में आने वाला हरेक अंजान शख्स इन छात्राओं को अपना नया टीचर लगता है और अक्सर उन्हें पूछने लगती हैं कि क्या वो उन्हें पढ़ाने के लिए आए हैं।
पड़ोस के स्कूल के अध्यापक आकर संभालते हैं व्यवस्था
बनगांव के गर्ल्स मिडिल स्कूल की व्यवस्था इतनी बदतर हो चुकी है कि स्कूल की सामान्य व्यवस्था संभालने के लिए भी कोई नहीं है। मिड-डे मील और अन्य व्यवस्थाओं को संभालने के लिए पड़ोस के प्राइमरी स्कूल के अध्यापक कभी कभी यहां आते हैं। ऐसे में छात्राओं की पढ़ाई उस तरीके से नहीं हो पाती जिस तरह से होनी चाहिए। छात्राओं को डर है कि कहीं इसका खामियाजा उन्हें परीक्षाओं में ना भुगतना पड़ जाए। गांव में आने वाले हर व्यक्ति से ये छात्राएं सिर्फ इतना कहती हैं कि उनके स्कूल में टीचर का इंतजाम करा दो, वे दिल लगाकर पढ़ेंगी। हालांकि हालात ये हैं कि अभी तक इन्हें झूठा आश्वासन तक नहीं मिला है।
ग्रामीणों की चेतावनी, टीचर भेजो नहीं तो नाम कटवा देंगे या स्कूल को जड़ देंगे ताला
स्कूल के एसएमसी अध्यक्ष बंसीलाल शिक्षा विभाग के ढीले रवैये खासे नाराज हैं। कहते हैं कि स्कूल एसएमसी का प्रधान होने के नाते, पंचायत के स्तर पर कई बार शिक्षा विभाग को अध्यापकों की कमी के बारे में लिखते रहते थे। अब तो एक भी अध्यापक नहीं बचा जो इन बच्चियों को पढ़ा सके। अब भी अगर अध्यापक नहीं आता तो या तो बच्चियों का स्कूल से नाम कटवा देंगे या फिर इस स्कूल को ही ताला जड़ देंगे। गांव के पूर्व सरपंच जयवीर ढाका कहते हैं कि पिछले दिनों गांव आए मंत्री कर्णदेव कंबोज को भी इस समस्या के बारे में बताया था लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली है।
किसी भी स्कूल, खासकर गर्ल्स स्कूल के लिए ऐसी व्यवस्था बहुत दुखदायी है। सरकार को तुरंत इस बारे में संज्ञान लेना चाहिए और फिलहाल फौरी तौर पर ही सही, लेकिन अध्यापकों की नियुक्ति करनी चाहिए।
-विकास टुटेजा, जिलाध्यक्ष राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, फतेहाबाद।
बनगांव मिडल स्कूल का मामला मेरे संज्ञान में आया है। जल्द ही इस बारे में कार्यवाही करेंगे। बच्चियों की पढ़ाई हमारे लिए पहली प्राथमिकता है। Ó
कृष्णा सिहाग, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद।