फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में 35 जगहों पर जली पराली, एएक्यूआई 422

विज्ञापन
रतिया-कुलां रोड पर फसल अवशेष में लगाई गई आग। - फोटो : Fatehabad
विज्ञापन
फतेहाबाद/टोहाना। लगातार बढ़ रही ठंड के बीच पराली से निकले धुएं के कारण धुंध जैसे हालात बन गए हैं। इस कारण सबसे अधिक परेशानी सुबह-सुबह वाहन लेकर जाने वाले वाहन चालकों को हो रही है। हवा नहीं चलने और ठंड बढ़ने से धुआं वातावरण में जम गया है।
विज्ञापन

वीरवार रात को भी जिले में 35 जगहों पर पराली में आग लगाई गई है। वहीं, दिन में भी कुछ स्थानों पर पराली जली, जिसके चलते शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक एएक्यूआई 422 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। इससे सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ गई। उधर, मौसम विभाग ने 17 नवंबर तक मौसम खुश्क रहने की संभावना जताई है। ऐसे में इसी तरह के हालातों से जूझना पड़ेगा।
सुबह-सुबह स्मॉग के कारण वाहनों की रफ्तार थमी
धुएं और ठंड के समायोजन से बने स्मॉग के कारण हाईवे पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है। सुबह-सुबह तो नेशनल हाईवे से लेकर लिंक मार्गों पर भी वाहन चालकों को वाहन चलाने में भारी परेशानी हुई। टोहाना से हिसार जाने वाले नेशनल हाईवे 148-बी पर भी ऐसे ही हालात रहे। हालांकि, सूरज निकलने के साथ धुंध का असर कम होने लगा। मगर सुबह 6 बजे तक तो वाहन चालक परेशान हुए।
विज्ञापन

सांस के रोगियों को यह आ रही समस्या
प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही सांस के रोगियों के हर रोज हालात बिगड़ रहे हैं। अस्थमा रोगियों की एएक्यूआई बढ़ने के साथ ही खांसी बढ़ जाती है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। हालांकि, नागरिक अस्पताल में ओपीडी ज्यादा नहीं बढ़ी है, लेकिन निजी अस्पतालों के फिजिशियन के पास सांस के रोगियों की ओपीडी डेढ़ गुणा तक बढ़ गई है।
समय एएक्यूआई
सुबह 9 बजे : 397
सुबह 10 बजे : 406
सुबह 11 बजे : 416
दोपहर 12 बजे : 422
दोपहर 1 बजे : 418
दोपहर 2 बजे : 412
दोपहर 3 बजे : 406
शाम 4 बजे : 399
शाम 5 बजे : 389
शाम 6 बजे : 380
कोट
मौसम आमतौर पर 17 नवंबर तक खुश्क रहने की संभावना है। इस दौरान उत्तर-पश्चिमी व पश्चिमी हवाएं हल्की से मध्यम गति तक चलने से रात्रि तापमान में हल्की गिरावट आएगी। अलसुबह व देर रात्रि को हल्की धुंध भी संभावित है।
डॉ. मदन खीचड़, अध्यक्ष, कृषि मौसम विज्ञान विभाग, एचएयू हिसार
कोट
वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ ही सांस के रोगियों की तकलीफ बढ़ जाती है। इसलिए सांस के रोगी अधिक सावधानी बरतें। जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। दुपहिया वाहन पर चलते समय हेलमेट व मास्क जरूर पहनें।
विज्ञापन

डॉ. मनीष टुटेजा, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें