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हिंसक कुत्तों की होगी नसबंदी

Thu, 12 Jun 2014 11:38 PM IST
fatehabad
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इस मामले में अब तक 300 से ज्यादा काले हिरण कुत्तों का शिकार हो चुके हैं। जिस कारण वन्यजीव प्राणी सभा व पीपुल्स फॉर एनीमल्स के सदस्य कुत्तों के बंधियाकरण को लेकर लगातार प्रयासरत थे। फतेहाबाद में कुत्तों  की वजह से काले हिरणों की बढ़ रही मौतों से चिंतित वन्यजीव प्रेमियों विनोद कड़वासरा व इंद्राज ज्याणी इत्यादि नेे 2009 में ही मेनका गांधी से संपर्क किया और इसके बाद अगस्त 2012 में दोबारा संपर्क करने के बाद अक्तूबर 2012 में जिले के तीन अधिकारियों को दिल्ली तलब किया और दिसम्बर 2012 में फतेहाबाद व हिरण बाहुल्य इलाके का दौरा करने के लिए 6 सदस्यीय टीम भेजी। इसके बाद मार्च 2013 में कुत्तों  का बंधियाकरण शुरू करने के लिए पीएफए व एचएसआई की तरफ  से 5 कैचर व 5 सर्जन की टीम जिला प्रशासन के पास पहुंची।
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उक्त टीम 30 दिन के लिए आई थी जिसके बाद प्रशासन द्वारा इसे जारी रखा जाना था, लेकिन किसी कारणवश यह अभियान बंद हो गया। इसके बाद भी लोगों ने बंधियाकरण अभियान के लिए बार बार राज्य व केन्द्र सरकार को पत्र व ज्ञापन भेजे जिसमें मारे गए 300 से अधिक काले हिरणों का ब्यौरा दिया गया।

भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने भी जुलाई 2013 में सर्वे करके इलाके में काले हिरणों के संरक्षण के लिए कुत्तों पर नियंत्रण जरूरी बताया था। इसके बाद भी अभियान शुरू नहीं हुआ तो वन्यजीव प्रेमियों ने लोक अदालत की शरण ली। इन्हीं प्रयासों के चलते अभी राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पूरे देश में प्रारंभिक स्तर पर एक राज्य व एक महानगर का चुनाव किया गया है जिसमें महानगर चेन्नई तथा हरियाणा राज्य का चुनाव किया गया है। इस कार्यक्रम को चलाने के लिए हर जिले से पशु चिकित्सक को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ  इंडिया ने एचएसआई, हयुमन सोसाइटी इंटरनेशनल के साथ मिलकर इसे शुरू करने का खाका तैयार कर लिया है। पुरे राज्य में कुत्तों की संख्या के लिए सर्वे की शुरूआत हो चुकी है जिसके लिए कई टीमों का गठन किया गया है।

कुतों की जनसंख्या पर नियंत्रण होगा। रैबिज का टीका लगने के बाद कुते पागल व रेबिजग्रस्त नहीं होगें।इसके अलावा खुजली जैसी भयावह बिमारी के टीके भी साथ ही लगाए जाते है जिससे इस बीमारी से भी राहत मिलेगी।कुते अक्सर बाहर बंधे पालतू पशुओं को भी काट लेते जिससे रैबिज होने से पशु मौत का शिकार होने से किसानों को लाखों का नुकसान होता है जो कि अब नियंत्रित होगा। बधियाकरण करने से कुतों की हिंसक प्रवृति कम होती है वन्यजीवों को भी नुकसान नहीं होगा।
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विनोद कड़वासरा जिलाध्यक्ष पीएफए फतेहाबाद
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