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आईसीयू में स्टाफ नर्सों को वेंटिलेटर चलाने में लगे पांच मिनट, ऑक्सीजन सप्लाई पर कम मिली मैनपॉवर

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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल की आईसीयू में स्टाफ नर्स से वेंटिलेटर चलवा कर देखते सीएमओ। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। कोरोना संक्रमण के जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार ज्यादा केस आने को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। कोरोना संक्रमण को लेकर कितने तैयार है इसको लेकर रविवार को जिले में मॉक ड्रिल की गई। सिविल सर्जन डॉ. वीरेश भूषण ने खुद की मौजूदगी में मॉक ड्रिल करवाई। कोविड वार्ड की आईसीयू में जब सीएमओ ने स्टाफ नर्सों को वेंटिलेटर चलाने के लिए कहा गया तो उन्हें चलाने में पांच मिनट लग गए। स्टाफ नर्स वेंटिलेटर की उलझी तारों को ठीक करती रह गईं।
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सिविल सर्जन ने इस पर स्टाफ नर्सों को कहा कि ये तरीका ठीक नहीं है, वेंटिलेटर चालू हालत में होने चाहिए और तारें और पाइपें उलझी नहीं होनी चाहिए। नागरिक अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट को लेकर भी मॉक ड्रिल की गई। सीएमओ ने अचानक ऑक्सीजन प्लांट बंद करवा दिया और फिर बैकअप जांचा। कोविड वार्ड में बैकअप मिला लेकिन प्लांट बंद करने के बाद बैकअप से ऑक्सीजन चलाने वाला कोई नहीं था। इस पर सिविल सर्जन ने आदेश दिए कि कोविड वार्ड में तैनात सभी कर्मचारियों को सप्लाई शुरू करने की ट्रेनिंग दी जाए।
ऑयल हीटर की कमी रही, करेंगे व्यवस्था : सीएमओ
मॉक ड्रिल के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कोविड वार्ड और आईसीयू में ऑयल हीटर की कमी रही। अधिकारियों के मुताबिक सर्दी में मरीज को जब लाया जाता है तो वह कांप रहा होता है, ऐसे में यहां पर हीटर होना जरूरी है। सामान्य हीटऱ् यहां कामयाब नहीं है और उससे घटना हो सकता है। यहां पर ऑयल हीटर की जरूरत है, जिनकी व्यवस्था की जाएगी।
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एंबुलेंस ने तय समय से पहले पहुंचाया, दी गई शाबाशी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने एंबुलेंस को लेकर भी मॉक ड्रिल की गई। एंबुलेंस टीम ने तय समय से पहले कोरोना संक्रमित को कोविड वार्ड में दाखिल करवा दिया और उनकी फाइल तैयार करवा दी। भट्टू, रतिया, जाखल और फतेहाबाद शहर के कोरोना संक्रमितों को एंबुलेंस टीम ने 35 से 45 मिनट में कोविड वार्ड में दाखिल करवा दिया।
24 लोगों पर की गई मॉक ड्रिल
स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय के आदेश पर जिले में मॉक ड्रिल की गई। मॉक ड्रिल को लेकर सैंपलिंग, होम आइसोलेट मरीज, गंभीर मरीज को शामिल किया गया। अधिकारियों ने अचानक डॉक्टरों और कर्मचारियों को फोन किए। एंबुलेंस कंट्रोल रूम से भी अचानक फोन किए गए कि कोरोना संक्रमित को लेकर आना है। करीब 24 लोगों को मॉक ड्रिल में शामिल किया था। मॉक ड्रिल में जांचा गया कि संक्रमित मिलने पर होम आइसोलेट टीम कितने समय में ट्रेस करती है और उस तक दवा पहुंचाती है।
कोट
महामारी अलर्ट मॉक ड्रिल की गई। करीब 24 लोगों पर मॉक ड्रिल की गई। इसमें जांचा गया कि इन लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैसे उपचार दिया है और कितने समय में टीम इन तक पहुंची और एंबुलेंस कितने समय में लेकर आई है। ऑक्सीजन प्लांट को लेकर भी मॉक ड्रिल की गई। स्टाफ को थोड़ा सा और ट्रेंड किया जाएगा। मॉक ड्रिल का ये फायदा है कि हमें कमियां पता लग रही है जिन्हें सुधारा जा रहा है।
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- डॉ. वीरेश भूषण, सिविल सर्जन
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