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Fatehabad News: खेल परिसर बदहाल, व्यवस्था पर खड़े सवाल

Sun, 14 Jun 2026 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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समैन। स्टेडियम परिसर में उगी खरपतवार। संवाद
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समैन। कबड्डी के लिए पहचान बना चुका गांव समैन अपनी खेल विरासत को संजोने के लिए संघर्ष कर रहा है। कभी यहां के खिलाड़ियों का कबड्डी में प्रदेशभर में दबदबा हुआ करता था। समय के साथ हालात ऐसे बने कि जो गांव खेल प्रतिभा के लिए जाना जाता था वहां की खेल व्यवस्था ही कमजोर पड़ गई है।
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गांव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई खिलाड़ी दिए जिनमें दलबीर चौधरी, महिला खिलाड़ी रामभतेरी गिल, मनीषा गिल और सुमन गिल शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से न केवल गांव बल्कि प्रदेश और देश का नाम भी रोशन किया। वर्तमान स्थिति इसके उलट हो रखी है। प्रतिभावान युवा संसाधनों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
वर्ष 2008 में जिला परिषद की ग्रांट से राजीव गांधी खेल परिसर का निर्माण किया गया था। उद्देश्य था कि गांव की खेल प्रतिभा को बेहतर मंच मिले लेकिन आज स्थिति यह है कि खेल परिसर बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां पीने के पानी, बिजली और शौचालय जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
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इसके बावजूद 150 से अधिक खिलाड़ी प्रतिदिन सुबह और शाम यहां अभ्यास करने पहुंचते हैं। इनमें कबड्डी, क्रिकेट, वॉलीबाल और दौड़ जैसे खेल प्रमुख हैं। खिलाड़ियों की मेहनत के बावजूद सुविधाओं की कमी उनके प्रदर्शन पर असर डाल रही है। शाम के समय लाइट व्यवस्था न होने से अंधेरा होते ही अभ्यास बाधित हो जाता है।
पानी की पाइपलाइन कई स्थानों पर लीकेज होने के कारण टंकी तक पानी नहीं पहुंच पाता है। शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है जिससे खिलाड़ियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। खिलाड़ी बलिंद्र गिल, सतीश जांगड़ा, महावीर सिंह, बेदी गिल और श्यामबीर गिल ने जिला प्रशासन और खेल विभाग से मांग की है कि खेल परिसर में मूलभूत सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं ताकि गांव की खेल प्रतिभा फिर से मजबूत होकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सके।

कोच नहीं आता मैदान में
स्टेडियम में खिलाड़ियों के तकनीक सिखाने के लिए कोच है लेकिन खिलाड़ियों का आरोप है कि वह यहां कभी आता ही नहीं। स्थिति यह है कि खिलाड़ी अपने वरिष्ठों से ही कबड्डी के गुर लेकर आगे बढ़ रहे हैं। खिलाड़ियों ने कहा कि कोच सुरेश कुमार अपनी ड्यूटी के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। वे यहां सप्ताह में कभी कभार ही आते हैं।

सुविधाएं मिले तो प्रतिभा में आए
गांव से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के कबड्डी निकले हैं इसलिए यहां के खेल परिसर में आधुनिक खेल सुविधाएं होनी चाहिए। जब तक खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी तब तक वह अपना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे।
- बेदी गिल, ग्रामीण
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खेल परिसर में पीने के पानी, शौचालय और बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए जो पाइपलाइन बिछाई गई है वह कई जगह से लीक है जिस कारण परिसर में बनी टंकी तक पानी नहीं पहुंच पाता। लाइट न होने से शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। जिससे उनको अपना अभ्यास रोकना पड़ता है। प्रशासन व खेल विभाग को इन समस्यायों की तरफ ध्यान देना चाहिए।
- बलिंद्र गिल, खिलाड़ी
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अगर सरकार सच में ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को तराशना चाहती है तो मैदान में बुनियादी सुविधाएं पीने का पानी, शौचालय, बिजली, कोच व आधुनिक खेल उपकरण मुहैया कराने होंगे। बिना सुविधाओं के पदक नहीं जीते जाते।
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- सतीश जांगड़ा, खिलाड़ी।
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