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Fatehabad News: कोई सत्ता के पक्ष में तो कोई विरोध की लहर में गोता लगाने को उत्सुक

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फतेहाबाद की ऑटो मार्केट में चाय की दुकान पर चुनावों को लेकर चर्चा करते नागरिक।
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फतेहाबाद। इस समय शहर और गांवों की गलियों में सिर्फ विधानसभा चुनाव की ही चर्चा है। कोई नेता को देखकर वोट देने का मन बना रहा है, तो कोई पार्टी के साथ जाएगा। कोई विचारधारा को तवज्जो दे रहा है, तो कोई सत्ता के पक्ष तो कोई विरोध की लहर में गोता लगाने के लिए उत्सुक है।
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कोई सार्वजनिक स्थान हो या चाय का खोखा, हर जगह किसी की हार तो किसी की जीत के चर्चे रहते हैं। शहर की ऑटो मार्केट में बनी चाय की दुकान पर बैठकर भी लोग चुनाव को लेकर चर्चा करते हुए नजर आए। यहां चुनावी चर्चा में रणजीत सिंह, जगदीश चंद्र, नंदलाल, सीताराम, हनुमान सिंह, वीरेंद्र आदि ने भाग लिया। इन्होंने कहा कि फतेहाबाद विधानसभा क्षेत्र में जिस गति से विकास होना चाहिए था, उस गति से विकास नहीं हो पाया। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद किसी भी विधायक ने क्षेत्र के विकास कार्यों की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र में जल निकासी, पेयजल, युवाओं को रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सड़कों आदि की समस्या का हल नहीं हो सका है।
क्षेत्र में नहीं लगा कोई बड़ा उद्योग, जिससे युवाओं को मिल सके रोजगार

रणजीत सिंह ने कहा कि काफी सालों से क्षेत्र के अंदर कोई भी बड़ा उद्योग नहीं लगा है। अगर कोई बड़ा उद्योग लगेगा तो युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। यह पूरे जिले की समस्या है। प्रदेश सरकार को प्रदेश में सभी कार्यालयों में रिक्त पदों को भरना चाहिए। इससे प्रशासनिक कार्य भी जल्दी होंगे और युवाओं को भी रोजगार मिल सकेगा। रणजीत सिंह ने कहा कि कि वह ऐसी सरकार का चुनाव करना चाहेंगे, जो शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव करें ताकि हर वर्ग के बच्चे शिक्षा को सुगमता और सरलता से प्राप्त कर अपने सपनों को साकार कर सकें। सरकारी स्कूल में शिक्षा का स्तर ऊंचा नहीं उठ पा रहा है। चर्चा के दौरान जगदीश चंद्र ने कहा कि शहर में दोपहर तक कूड़ा उठाने में लगे रहते हैं। इससे परेशानी झेलनी पड़ती है। नगर परिषद को सुबह-सुबह ही कूड़े के उठान की व्यवस्था करवानी चाहिए। वहीं क्षेत्र में गांवों की ओर जाने वाले रास्तों की हालत भी काफी खराब है। नंदलाल ने बीच में बोलते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज आकर भी वापस चला गया है, इससे बड़ी बात क्या होगी। मेडिकल कॉलेज जिला मुख्यालय पर बनता तो शहर का नक्शा ही बदल जाता। हर घर को रोजगार मिल जाता। वहीं, वीरेंद्र ने कहा कि किसी और को भी मौका मिलना चाहिए, जो शहर और गांव के विकास के बारे में सोच सके। सीताराम ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार ने सुधार करने के प्रयास किए हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए।
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