फतेहाबाद। भगवान शिव की आराधना के माने जाने वाले सावन मास की शुरुआत इस वर्ष 30 जुलाई से होगी। इस बार सावन मास में चार सोमवार पड़ेंगे। सावन का समापन रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा जिससे धार्मिक और पारिवारिक उत्सव का विशेष संयोग बनेगा।
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। महिलाएं और युवतियां अच्छे वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सोमवार का व्रत रखती हैं।
भगवान शिव की आराधना का पवित्र सावन मास इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होगा और 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ इसका समापन होगा। सावन में इस बार चार सोमवार पड़ेंगे, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रहेगा। पहले सोमवार से लेकर अंतिम सोमवार तक शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और जलाभिषेक के आयोजन होंगे।
सावन के तीसरे सोमवार को नागपंचमी पर्व
सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा, जिसे भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त को होगा। इस दिन प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को पड़ेगा और इसी दिन नागपंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त को रहेगा। वहीं सावन माह के आखिरी दिन ही रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा।
शिव पूजा में इन चीजों का विशेष महत्व
शहर के दुर्गा के पंडित महेंद्र प्रसाद ने बताया कि सावन मास में भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पूरे महीने व्रत रखकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। इस बार 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या भी मनाई जाएगी। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान-पुण्य और पौधरोपण का विशेष महत्व माना गया है। सावन मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे लेकिन भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक और शिव चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु विशेष रूप से सोमवार के दिन उपवास रखकर शिव परिवार की पूजा करेंगे और जीवन में सुख-शांति, समृद्धि व मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।