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Fatehabad News: पराली को बॉयलर के ईंधन के रूप में प्रयोग करके धान से निकाला जा रहा चावल

Sun, 05 Nov 2023 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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टोहाना में अपने राइस शैलर में पराली की गांठों को भट्टी में डलवाते प्रवीन चौधरी।
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फतेहाबाद। पराली प्रबंधन को लेकर अगर राइस शैलर भी आगे आएं तो कुछ हद तक पराली जलाने के मामलों में कमी आ सकती है। इस मामले में टोहाना के चौधरी सोल्वेंट के राइस शैलर मालिक ने पहल की है। उन्होंने अपने राइस शैलर में बॉयलर की भट्टी को लाखों रुपये खर्च करके मल्टीपल बना दिया है, यानि वह बॉयलर को जलाने के लिए ईंधन के तौर पर पराली, ग्वार व सरसों की तूड़ी का भी प्रयोग कर सकते हैं। इस साल भी उन्होंने 40 हजार क्विंटल पराली खरीदने का लक्ष्य तय किया हुआ है और करीब 20 हजार क्विंटल पराली वह खरीद चुके हैं।
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फतेहाबाद जिला पराली जलाने के मामले में पूरे प्रदेश में नंबर वन चल रहा है। पिछले साल भी जिले में पराली जलाने के अनेक मामले सामने आए थे और इस साल भी पराली जलाने के मामलाें में कोई कमी नहीं आ रही है। पराली प्रबंधन के मामलों में भले ही प्रशासन फेल रहा हो, लेकिन फतेहाबाद के टोहाना में स्थित चौधरी सोल्वेंट राइस शैलर के मालिक पराली प्रबंधन के मामले में पूरा सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने अपने शैलर के बॉयलर की भट्टी को करीबन 20 से 25 लाख रुपये में मोडिफाई करवाया है। पहले बॉयलर की भट्टी में केवल कोयले का प्रयोग होता था, लेकिन अब इस भट्टी में पराली, ग्वार व सरसों की तूड़ी भी प्रयोग की जा सकती है।
शैलर मालिक प्रवीन चौधरी ने पराली प्रबंधन में सहयोग करने की बात कही है। उन्होंने अब तक करीब 20 हजार क्विंटल तक पराली की खरीद कर ली है और 40 हजार क्विंटल पराली खरीदने का उनका लक्ष्य है। बेलर मालिकों से वह लगातार पराली खरीद रहे हैं और धान से चावल बनाने के लिए इसका प्रयोग ईंधन के तौर पर कर रहे हैं।
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जिले में 247 अधिकृत राइस शैलर
फतेहाबाद जिले में इस समय 247 राइस शैलर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह राइस शैलर भी टोहाना के राइस शैलर संचालक की तरह अपने बॉयलर की भट्टियां मोडिफाई करवाकर पराली खरीदने लगे तो जिले में पराली जलने के मामलों में काफी कमी आ जाएगी। एक एकड़ में लगभग 20 क्विंटल धान की पराली बनती है। अगर हर राइस शैलर भी 20 से 40 हजार क्विंटल धान की खरीद भी करता है तो जिले में पराली जलाने के मामलों में 80 फीसदी तक कमी आ सकती है। इससे बेलर संचालकों को भी काफी राहत मिलेगी और उनको पराली के अच्छे दाम मिल जाएंगे।



अगर राइस शैलर में बॉयलर की भट्टी को मोडिफाई करवाकर इसे मल्टीपल करवा लिया जाए तो धान से चावल निकालने के भट्टी में पराली की गांठों का प्रयोग आसानी से किया जा सकता है। मैंने अपने राइस शैलर में इस भट्टी को मोडिफाई करवाया है और इस बार 40 हजार क्विंटल पराली की गांठें खरीदने का टारगेट है।
प्रवीन चौधरी, संचालक चौधरी सॉल्वेंट, टोहाना



टोहाना के राइस शैलर मालिक प्रवीन चौधरी पराली प्रबंधन में अच्छा कार्य कर रहे हैं। अगर अन्य राइस शैलर मालिक जिनके पास बॉयलर है, अगर वह भी इस संबंध में कदम उठाएं तो बेलर संचालक फतेहाबाद में ही पराली की गांठें बेच सकेंगे। इससे एक तो पराली जलने की घटनाओं में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर किसानों व बेलर संचालकों को भी आर्थिक रूप से फायदा होगा।
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पवन कुमार, असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजीनियर, फतेहाबाद।
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