ज्वालानगर में काले कानून का 'दसवां संस्कार'
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जाखल के स्वर्णकारों की बैठक में उस समय विवाद हो गया जब संघ के जाखल प्रधान ने कुछ दुकानदारों के द्वारा हड़ताल के चलते दुकानों से चोरी छुपे माल बेचने पर एतराज जताया। प्रधान की इस बात का कुछ सदस्यों ने विरोध कर दिया, जिस पर प्रधान ने बैठक का बहिष्कार कर पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने नई कार्यकारिणी बनाने की भी सहमति जता दी है। फिलहाल मामला गर्माया हुआ है।
केंद्र सरकार की ओर से बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी विरोध में जाखल स्वर्णकार संघ सदस्यों की बैठक अग्रवाल धर्मशाला में हुई। बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष करनैल खिप्पल ने की। वहीं संघ के जाखल प्रधान कृष्ण कुमार काका भी शामिल रहे। बैठक में दो मार्च से जारी हड़ताल को जारी रखते हुए संघर्ष करते रहने के लिए चर्चा की गई, वहीं कुछ दुकानों को खोलने तथा ग्राहकों को चोरी छुपे सामान देने पर प्रधान ने एतराज जताया।
प्रधान कृष्ण कुमार काका ने कहा कि कुछ सदस्य हड़ताल के दौरान दुकानों से ग्राहकों को चोरी छुपे माल बेचते हैं। इस बात पर दूसरे सदस्य ने एतराज जताया व दुकानों को खोलने के लिए कुछ समय निर्धारित करने की बात रखी। दोनों मुद्दों पर स्वर्णकारों में विवाद बन गया। प्रधान कृष्ण कुमार काका ने बैठक का बायकाट कर अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही। बैठक में सतपाल, लाभ सोनी, मोहित, सोनू अग्रवाल, मक्खन गर्ग, सुरेंद्र सिधानी, अमित वर्मा, संदीप वर्मा, पैरी खिप्पल, टिंकु वर्मा, इत्यादि सदस्य मौजूद रहे।
कुछ सदस्य कर रहे अवमानना
प्रधान कृष्ण काका ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने दुकानों को चोरी छुपे खोलकर ग्राहकों को सामान देने पर एतराज जताया है। ऐसा करने वाले दुकानदारों को बात रास नहीं आई। इसी वजह से उन्होंने बैठक का बायकाट किया व अपने पद से इस्तीफा देते हुए नई कार्यकारिणी बनाने की सहमति जताई है। वहीं, स्वर्णकार संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष करनैल खिप्पल ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी के विरोध में उनका संघर्ष जारी रहेगा।