हादसे के बाद सरकारी अस्पताल में राजप्रीत के पिता को संभालते परिजन ।
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सोमवार रात एकाएक फतेहाबाद के गांव हिजरावांकलां में हाहाकार मच गया। सब ओर चीख-पुकार गूंज रही थी, गांव के सरपंच धर्मवीर अरोड़ा जैसे ही बाहर की ओर निकले तो देखा कि पास की ढाणी से धड़ाधड़ गाडिय़ां निकल रही हैं और उसमें सवार लोग रोए जा रहे हैं। सरपंच धर्मवीर अरोड़ा ने भी उनके पीछे कार लगाई और फतेहाबाद के सरकारी अस्पताल पहुंच गए। यहां आकर ढाणी में सबमर्सिबल हादसे के बारे में पता चला और इस बीच चिकित्सकों ने अस्पताल में लाए चारों लोगों कश्मीर सिंह, राजप्रीत सिंह, गुरदास और हरफूल को मृत घोषित कर दिया। इसी के साथ अस्पताल में मौजूद गांव हिजरावांकलां का प्रत्येक शख्स फूट-फूटकर रोने लगा। परिवार की महिलाएं छाती पीटने लगी। अस्पताल के अंदर गहरी नींद में सोए बाकी मरीज एकाएक हुए इस चीख-पुकार से जाग उठे और जैसे ही उन्हें एक ही हादसे में चार लोगों की जान जाने का पता चला तो अस्पताल में मौजूद कोई भी इंसान एकबारगी तो अपने आंसू नहीं रोक पाया।
पोस्टमार्टम रूम में मृत बच्चे के सिर पर हाथ फेरते रहे राजप्रीत के पिता
चिकित्सकों द्वारा चारों को मृत घोषित करने के बाद अस्पताल कर्मचारी पिछले दरवाजे से चारों लोगों के शवों को पोस्टमार्टम रूम में ले गए। बाद में सदर पुलिस द्वारा शवों की जांच करने के दौरान पोस्टमार्टम रूम के अंदर पहुंचे राजप्रीत के पिता मलकीत सिंह अपने इकलौते बेटे के शव के सिर पर हाथ फेरते रहे। इस दौरान भी उनकी आंखों से आंसू नहीं रूक रहे थे भले ही मुंह से वो खुद को संभाले हुए थे। उनकी दशा देखकर पोस्टमार्टम रूम में मौजूद सदर एसएचओ सहित अन्य पुलिसकर्मी भी भावुक हो उठे। राजप्रीत के पिता ने इस दौरान पोस्टमार्टम रूम में मौजूद गांव के सरपंच धर्मवीर अरोड़ा को सिर्फ इतना कहा कि उसके बेटे के शरीर पर कट मत लगवाओ यार। इसके बाद अन्य परिजन उन्हें पोस्टमार्टम रूम से बाहर ले गए। राजप्रीत अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था, अब उसकी बहन ही घर में अकेली बची रह गई है।
औजार लाने अंदर गया तो बच गया दूसरा मिस्त्री
हादसे का शिकार हुआ गुरदास मिस्त्री हरफूल का सहयोगी था। अस्पताल में मौजूद गुरदास के पिता कृष्ण ने रोते हुए बताया कि गुरदास को उसने रात के समय जाने से रोका भी था लेकिन गुरदास जिद करके चला गया। कृष्ण ने बताया कि जाते-जाते गुरदास उसे कहकर गया कि आज-आज रात को काम पर जा रहा था, फिर नहीं जाऊंगा। उसे क्या पता था कि गुरदास इसके बाद कभी लौटकर ही नहीं आएगा। दूसरी ओर इस हादसे में बाल-बाल बचा दूसरा मिस्त्री वीरेंद्र अभी तक सदमे से बाहर नहीं आ सका है। वीरेंद्र भी बीती रात को सबमर्सिबल पाइप फिट करने में बाकी मृतकों के साथ काम कर रहा था। इस दौरान वो किसी औजार को लेने के लिए ढाणी के अंदर गया था । उसके पीछे अचानक से ये हादसा हो गया। वो औजार लेकर वापिस आया तो देखा कि सभी बेसुध पड़े हैं और ऊपर पाइप बिजली की हाईवोल्टेज तारों से छू चुका है। उसे सारा माजरा समझते देर नहीं लगी और उसने शोर मचा दिया।
सुनसान रही गांव की गलियां, इशारे से ढाणी का रास्ता बताते रहे ग्रामीण
हादसे के अगले दिन मंगलवार को गांव हिजरावांकलां की गलियां सुनसान रही। ग्रामीण इस हादसे के बारे में आपस में तो चर्चा करते दिखे लेकिन किसी भी अजनबी से इस बारे में कोई बात नहीं कर रहे थे। जिस जगह हादसा हुआ, उसके बारे में पूछे जाने पर भी महज हाथ से इशारा कर रास्ता बताते रहे। मंगलवार को काफी संख्या में ग्रामीण मृतकों के घर शोक जताने पहुंचे। विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया और पंचायत समिति चेयरपर्सन मुख्यातार सिंह बाजीगर अस्पताल परिसर में पहुंचे और मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी।