फतेहाबाद पुलिस लाइन में प्रशिक्षण के दौरान मौजूद पुलिसकर्मी स्त्रोत पुलिस विभाग
फतेहाबाद। नशा तस्करों पर कार्रवाई सिर्फ नशीला पदार्थ बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पुलिस को जांच की कड़ियां जोड़कर सप्लायर, बिचौलियों, फाइनेंसर और पूरे तस्करी नेटवर्क तक पहुंचना होगा। मजबूत और कानूनसम्मत साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपियों को अदालत से सजा दिलाई जा सकती है।
ये बात उप जिला न्यायवादी विजय वर्मा ने सोमवार को पुलिस लाइन में आयोजित अनुसंधान अधिकारियों के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही।उन्होंने जिलेभर से पहुंचे पुलिस अधिकारियों और अनुसंधानकर्ताओं को एनडीपीएस एक्ट के तहत मामलों की जांच की बारीकियां समझाईं।
उन्होंने कहा कि पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों को तकनीकी, दस्तावेजी, वित्तीय और स्वतंत्र साक्ष्यों से जोड़ना जरूरी है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि नशीला पदार्थ कहां से आया, किसने सप्लाई किया और आगे इसकी आपूर्ति किन लोगों तक की जानी थी।
प्रशिक्षण में सूचना मिलने से लेकर तलाशी, बरामदगी, जब्ती, सीलिंग, सैंपलिंग, केस प्रॉपर्टी की सुरक्षा, मालखाना प्रक्रिया, प्रयोगशाला जांच और चालान पेश करने तक की कानूनी प्रक्रिया समझाई गई।
विजय वर्मा ने कहा कि जांच में छोटी प्रक्रियात्मक या दस्तावेजी चूक भी अभियोजन को कमजोर कर सकती है इसलिए प्रत्येक कार्रवाई पारदर्शी, समयबद्ध और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सफल पुलिसिंग का मकसद केवल नशा पकड़ना नहीं, बल्कि पूरे तस्करी नेटवर्क को उजागर कर दोषियों को सजा दिलाना है।