फतेहाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर रोहतक व जीवन बीमा निगम चंडीगढ़ को अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस करने पर उपभोक्ता को 11 हजार रुपये की राशि हर्जाने के रूप में 45 दिन के भीतर देने के आदेश दिए हैं। यदि आयोग के आदेश की पालना 45 दिन में नहीं होती तो इन दोनों पक्षों को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
जानकारी के मुताबिक गांव काजलहेड़ी निवासी राजेंद्र पाल ने अपने अधिवक्ता राजबीर सिंह के जरिए आयोग में रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर रोहतक व जीवन बीमा निगम चंडीगढ़ के खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज करवाई कि उसने रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर रोहतक के जरिये 1,70000 की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी, जिसका प्रीमियम 20179 रुपये जमा करवाया था। यह पॉलिसी 28 दिसंबर 2013 को पूरी हो गई थी, लेकिन कंपनी ने पॉलिसी के लाभ की राशि जारी नहीं की। आयोग की ओर से नोटिस के जवाब दावा में रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर रोहतक ने बताया कि कार्यालय दूसरी जगह शिफ्ट करने की वजह से उपभोक्ता के कागजात नहीं मिले। वहीं जीवन बीमा निगम में अपने जवाब में कहा कि उसने कागजात की फोटोकॉपी मिलने के बाद बीमा क्लेम के सेटलमेंट करके 9916 रुपये पॉलिसी धारक के खाते में जारी कर दिए। आयोग ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उपभोक्ता राजेंद्रपाल की याचिका को स्वीकार करते हुए उपभोक्ता को 11 हजार रुपये हर्जाने के तौर पर देने के आदेश दिए हैं। संवाद