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Fatehabad News: वाटिका उजाड़ने की लीला देखने के लिए उत्साहित रहते हैं लोग

Tue, 29 Sep 2026 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद। चिल्ली वाली धर्मशाला में होने वाली रामलीला को लेकर तैयारियां करते कलाकार। आयोजक
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फतेहाबाद। पुरानी तहसील चौक में स्थित श्रीराम सेवा समिति धर्मशाला में देश की आजादी से पहले ही रामलीला का मंचन किया जा रहा है। यह रामलीला आसपास के क्षेत्रों की सबसे एतिहासिक है। लगातार 98 साल से रामलीला चल रही है। इस बार 99 वीं बार चिल्ली वाली धर्मशाला में रामलीला का मंचन होगा।
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इस बार रामलीला में निर्देशन करने वाले विनोद गर्ग उर्फ नानू की याद में मंचन उनके द्वारा पुराने तैयार किए गए कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। 14 अक्तूबर को रामलीला की शुरुआत होगी। विनोद गर्ग उर्फ नानू करीब 25 साल से रामलीला में निर्देशक की भूमिका निभा रहे थे। इस बार भी वे रामलीला की तैयारियों को काफी खुश थे लेकिन तैयारियों से पूर्व उनका निधन हो गया।
इस रामलीला की शुरुआत 1928 में पंडित सूरजभान ने की थी। तब संसाधन कम थे लेकिन पंडित सूरजभान व उनके साथियों ने कड़ी मेहनत की। रामलीला के आयोजन में आज तक कोई व्यवधान नहीं पड़ा और लोग भक्ति भाव से इसको देखते हैं। रामलीला के कलाकारों के लिए दिल्ली से स्पेशल पोशाकें लाई जाती हैं। पहले दिन गणपति पूजन के बाद भगवान श्रीराम का जन्म और दशहरे तक रावण वध तक का मंचन किया जाता है। रामलीला में सबसे अधिक लोकप्रिय मंचन चाची ताड़का वध, सीता स्वयंवर, लक्ष्मण-परशुराम संवाद, भगवान हनुमान द्वारा वाटिका को नष्ट करना है। इन लीला का मंचन का लोगों को इंतजार रहता है।
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अच्छा किरदार कर देंगे विनोद गर्ग को श्रद्धांजलि
विनोद गर्ग उर्फ नानू के साथ उप निदेशक के तौर पर काम करने वाले शंकर बंसल और गौरव बंसल ने बताया कि मंच उनकी कमी को पूरा नहीं कर सकता है। इस बार सभी कलाकार उनके बताए संवादों को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने कहा कि विनोद गर्ग ने कलाकारों को संवाद अदायगी से लेकर मंच पर अभिनय की बारीकियां तक सिखाईं। उनका मार्गदर्शन हमेशा कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। मंच पर उनके किरदार और संवादों को याद करते हुए कलाकार इस बार प्रस्तुति में अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करेंगे। उनके साथ बिताए समय को याद करते हुए कलाकारों ने कहा कि विनोद गर्ग केवल निर्देशक ही नहीं बल्कि सभी कलाकारों के लिए मार्गदर्शक और परिवार के सदस्य की तरह थे। उनकी कमी हमेशा महसूस होगी, लेकिन उनके सिखाए अभिनय और संवादों के जरिए उनकी याद मंच पर जीवित रहेगी।
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