फतेहाबाद। नगर परिषद की ओर से शहर के पार्कों को गोद देने की योजना जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही है। शहर की विभिन्न संस्थाओं को सौंपे गए 14 पार्कों में से अधिकतर की हालत बद से बदतर होती जा रही है। सफाई और हरियाली की जिम्मेदारी लेने वाली संस्थाएं अपनी जिम्मेवारी नहीं समझ रही हैं, जिसके चलते ये पार्क व ग्रीन बेल्ट अब गंदगी और उपेक्षा का शिकार बन गए हैं।
नगर परिषद ने शहर के पार्क में सौंदर्य को बढ़ाने और आम जनता को स्वच्छ वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से इन को सामाजिक संगठनों और संस्थाओं को गोद दिया था। इसका मुख्य मकसद यह था कि परिषद पर सफाई का बोझ कम होगा और संस्थाओं के सहयोग से पार्कों की देखरेख बेहतर तरीके से हो पाएगी।
मगर, मौजूदा हालात इसके ठीक विपरीत हैं। ये संस्थाएं नगर परिषद पर दोहरी मार कर रहे हैं। एक तरफ तो पार्क में सफाई व रखरखाव नहीं हो पा रहा है। वहीं प्रत्येक माह ये संस्थाएं नगर परिषद से सफाई व रख रखाव को लेकर प्रति वर्ग फीट के हिसाब से पैसे भी दे रही हैं।
गोद लिए पार्क, मगर संभाल नहीं
नगर परिषद की ओर से पार्क गोद देने के शुरुआती दिनों में तो संस्थाओं ने काफी रुचि दिखाई, लेकिन समय बीतने के साथ ही उनकी दिलचस्पी खत्म होती गई। अब स्थिति यह है कि पार्कों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, घास और अनवांछित पौधे बेतरतीब तरीके से बढ़ गए हैं, वहीं पार्कों में लगे कूड़े के ढेर वहां की सुंदरता को फीका कर रहे हैं। वहीं सबसे चिंताजनक हाल हरित पट्टी की है, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन हरित पट्टियों में भी काफी गंदगी फैली हुई है।
लाखों का मासिक खर्च भी सवालों के घेरे में
नगर परिषद हर महीने इन पार्कों की देखरेख पर लाखों रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद पार्कों का बदहाल होना नगर परिषद के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। दुकानदारों व आसपास रहने वाले लोगों का आरोप है कि अधिकारी बिना सही निरीक्षण किए ही संस्थाओं के बिल पास कर देते हैं, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
संस्थाओं को गोद दिए गए सभी 14 पार्कों का निरीक्षण करेंगे। अगर उस समय जिन संस्थाओं या संगठनों ने पार्कों की देखभाल में लापरवाही बरती है तो उनके खिलाफ नियमों के अनुसार जुर्माना भी लगाया जाएगा।
- राजेंद्र सोनी, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद, फतेहाबाद।