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निजी अस्पतालों में दोपहर तक बंद रही ओपीडी, मरीज परेशान

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उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते आईएमए सदस्य। - फोटो : Fatehabad
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आईएमए के आह्वान पर निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने शुक्रवार को ओपीडी बंद रखी। देश में कई जगहों पर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर हुए हमले के विरोध में सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक ओपीडी बंद रखी गई। इस दौरान डॉक्टरों ने सामान्य मरीजों का उपचार नहीं किया हालांकि इमरजेंसी में आए मरीजों को उपचार दिया गया।
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निजी अस्पतालों में उपचार करवाने आए सामान्य मरीजों को काफी परेशानी हुई। ओपीडी बंद होने के चलते वापस लौटना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी गांवों से आए मरीजों को हुई। निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से नागरिक अस्पताल की ओपीडी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। लेकिन चर्म रोग विशेषज्ञ और फीजिशियन की ओपीडी में 20 फीसदी की बढ़ोतरी रही। आईएमए के आह्वान पर बंद की गई ओपीडी से बच्चों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। अभिभावक बच्चों को दवाई दिलवाने के लिए लेकर आए लेकिन ओपीडी बंद होने से लौटना पड़ा। शिशु रोग विशेषज्ञ के अस्पतालों के बाहर बच्चों को लेकर अभिभावक परेशान दिखे।
आईएमए ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
आईएमए ने देश में अलग-अलग जगहों पर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर किए गए हमले के विरोध में उपायुक्त महावीर कौशिक को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान आईएमए फतेहाबाद प्रधान एचसी दहिया, सचिव डॉ. रिपु दमन, डॉ. विनय सिंगला, डॉ. पवन मेहता आदि मौजूद थे। सचिव डॉ. रिपु दमन ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों का उपचार किया है लेकिन इसके बावजूद इन पर हमले हो रहे है। सरकार इसको लेकर ठोस कदम उठाए।
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