शहर के रोहतक रोड स्थित जनता अस्पताल में उस समय सन्नाटा पसर गया, जब डेढ़ दशक से वेतनवृद्धि का इंतजार कर रही नर्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अचानक हड़ताल पर चले गए। न केवल अस्पताल के गेट पर नारेबाजी की, बल्कि ड्यूटी छोड़कर घर चले गए। देर रात तक मरीज लावारिस हालत में पड़े थे। एक डॉक्टर बाहर से तीन युवकों को बुलाकर लाए हैं और यही लोग मिलकर मरीजों की देखभाल कर रहे हैं।
अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने बताया कि वे 15 साल से नौकरी कर रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें आठ से नौ हजार रुपये ही वेतन दिया जा रहा है। वेतनवृद्धि के बारे में जब प्रधान और अस्पताल प्रबंधन कार्यकारिणी से बात करते हैं तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती है। शाम करीब पांच बजे कर्मचारी अस्पताल के गेट के बाहर एकत्र हुए और नारेबाजी की। इसके बाद रात को ड्यूटी पर आने की बजाय ज्यादातर कर्मचारी घर चले गए। इसके चलते अस्पताल में दाखिल मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मरीजों की आपबीती
बेटे को खुद देने पड़ी दवाई
फतेहपुर निवासी सुरेंद्र ने बताया कि उसके बेटे को बुखार है। पांच बजे के बाद कोई नर्स नहीं आई। एक डॉक्टर आए, लेकिन कोई दवा नहीं दी। ऐसे में खुद ही कल वाली दवा देनी पड़ी।
मां को नहीं कर रहे दाखिल
मिशन चौक निवासी अमित कुमार ने बताया कि उसकी मां संतोष के पेट में अचानक दर्द उठा तो वे रात 10 बजे अस्पताल लेकर आए, लेकिन डाक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। कह रहे हैं कि स्टाफ नहीं है।
मां को ऑक्सीजन लगाकर छोड़ दिया
माछरी निवासी दर्शना देवी ने बताया कि उसकी मां लाडो देवी को सांस लेने में परेशानी हो रही है। ऑक्सीजन तो लगा दी गई, लेकिन अब कोई देखने नहीं आ रहा है।
सुई हटाने ही बहने लगा हाथ से खून
थरैया गांव निवासी ज्योति ने बताया कि दो दिन से दाखिल है। पेट में दर्द के चलते उपचार चल रहा है। ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है, लेकिन कर्मचारी हड़ताल पर जाने के बाद सुई हटाने कोई नहीं आया। कहने पर बाहर से एक युवक बुलाया गया, जिसके सुई हटाते ही खून बहने लगा। उसे हाथ में काफी दर्द हो रहा है।
जनता अस्पताल प्रबंधन समिति के प्रधान अजय गोयल से सीधी बातचीत
सवाल : अस्पताल की नर्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 15 साल से मात्र 8 हजार रुपये मिल रहे हैं। ऐसा क्यों।
जवाब : सरकार के नियमों के तहत ही वेतन दे रहे हैं। धर्मार्थ अस्पताल में अपने स्तर पर वेतन नहीं बढ़ा सकते।
सवाल : नर्स और कर्मचारी ड्यूटी छोड़कर हड़ताल पर क्यों चले गए।
जवाब : वेतनवृद्धि की मांग कर रहे थे। समझाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं माने।
सवाल : अस्पताल में अंदर मरीज तड़प रहे हैं, कोई अनहोनी हो तो जिम्मेदार कौन होगा।
जवाब : कर्मचारियों को मांग रखनी चाहिए, लेकिन यूं ड्यूटी छोड़कर नहीं जाना चाहिए। बाहर से व्यवस्था की है।
सवाल : बाहर से बुलाए युवक क्या एक्सपर्ट हैं।
जवाब : थोड़ी देर रुककर, कोई न कोई तो व्यवस्था करनी पड़ती है।