फतेहाबाद। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों चिकित्सकों की कमी दूर होने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) के तहत विशेषज्ञों की भर्ती कर रहा है। इसके तहत नागरिक अस्पताल को पहली बार गेस्ट्रो यानि पेट रोग विशेषज्ञ मिलने जा रहा है। इसके अलावा अस्पताल को आठ साल बाद फिजिशियन भी मिल गया है।
अब मरीजों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए हिसार या फिर अग्रोहा मेडिकल नहीं जाना होगा। यही नहीं अस्पताल को शिशु रोग विशेषज्ञ भी मिला है। अस्पताल में पहले भी एनएचएम के तहत शिशु रोग विशेषज्ञ है। टोहाना के उप नागरिक अस्पताल को भी शिशु रोग मिल गया है। इसके अलावा रतिया के नागरिक अस्पताल में भी अब महिला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी शुरू हो गई है।
विभाग के पास 6 विशेषज्ञों के आवेदन आए थे। इसमें तीन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके अलावा दो डॉक्टरों की भी जल्द ज्वाइनिंग हो सकती है। फिलहाल फिजिशियन के पद पर डॉक्टर अरमान, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रोबिन और महिला रोग विशेषज्ञ के पद पर डॉ. मयंजलि की नियुक्ति हुई है। संवाद
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विशेषज्ञों का वेतन दोगुना, एनएचएम में फायदा
स्वास्थ्य विभाग में स्थायी नियुक्ति पर 60 से 70 हजार रुपये वेतन मिलता है लेकिन एनएचएम के तहत भर्ती होने वाले विशेषज्ञों को स्वास्थ्य विभाग डेढ़ लाख रुपये तक वेतन दे रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ एनएचएम के तहत भर्ती में ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि जिले में डॉक्टरों के करीब 170 पद है लेकिन इसमें से 90 पद खाली पड़े हैं।
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30 फीसदी तक हाई रिस्क श्रेणी में गर्भवती
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत अस्पताल में माह में चार दिन शिविर लगाए जा रहे है। इसमें गर्भवती की जांच करके हाई रिस्क प्रेगनेंसी चिह्नित की जा रही है। शनिवार को अस्पताल में कैंप लगाया गया। इसमें 147 गर्भवती की जांच हुई। करीब 48 गर्भवती हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित हुई है। ऐसे में रतिया में महिला रोग विशेषज्ञ आने से गर्भवती को फायदा मिलेगा।
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नागरिक अस्पताल को फिजिशियन और रतिया उप नागरिक अस्पताल महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हुई है। ओपीडी शुरू होने से मरीजों को फायदा मिलेगा। जल्द ही एनएचएम के तहत और विशेषज्ञ की मिलने की उम्मीद है।
-डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन