फतेहाबाद। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग जल्द नई वैक्सीन लॉन्च करने जा रहा है। नई वैक्सीन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। शिशुओं को अब रोटासिल वैक्सीन लगाई जाएगी। रोटावायरस से शिशुओं को बचाने के लिए अब तक स्वास्थ्य विभाग रोटावैक वैक्सीन लगा रहा था लेकिन अब विकल्प के लिए रोटासिल वैक्सीन को भी शामिल किया जा रहा है।
इस वैक्सीन की भी शिशुओं को जन्म के 6,10 और 14 वें सप्ताह पर खुराक दी जाएगी। खास बात यह है कि ये वैक्सीन सिंगल डोज पैकिंग में होगी। दो एमएल वैक्सीन लिक्विड ट्यूब में होगी। इसे भी दो से आठ डिग्री तापमान पर स्टोर किया जाएगा। रोटावैक वैक्सीन की पैकिंग पांच डोज की है। डॉक्टरों की माने तो शिशुओं की ज्यादातर मौत का कारण डायरिया रहता है। रोटावायरस इंफेक्शन गंदगी से फैलता है। इंफेक्शन बच्चे के शरीर में जाने के बाद एक से दो दिन में लक्षण पैदा करता है। अगर बच्चे को रोटावायरस की वैक्सीन दी जाती है तो बीमारी का खतरा कम हो जाता है। संवाद
रोटावायरस इंफेक्शन के कारण दिख सकते हैं ये लक्षण
सुस्ती होना
चिड़चिड़ापन
प्यास अधिक लगना
त्वचा में कम लचीलापन।
आंखें गहरी धंसी हुई दिखाई देना।
पेशाब कम आना
मुंह सूखा लगना
शिशुओं का ये होता है टीकाकरण
जन्म के समय : बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटिस बी,
छह सप्ताह पर : ओपीवी पहली, पेंटावेलेंट पहली, आइपीवी पहली, रोटा पहली और पीसीवी पहली डोज
10 सप्ताह पर : ओपीवी दूसरी, पेंटावेलेंट और रोटा की दूसरी डोज
14 सप्ताह पर : ओपीवी तीसरी, पेंटावेलेंट तीसरी, आईपीवी, रोटा तीसरी और पीसीवी दूसरी डोज
9 से 12 माह : एमआर पहली डोज, पीसीवी बूस्टर, जेई
16 से 24 माह : एमआर दूसरी डोज, डीपीटी बी, ओपीवी बी, जेई
5 से 6 साल : डीपीटी बूस्टर डोज
10 साल : टीडी
16 साल : टीडी
कोट
रोटासिल वैक्सीन जल्द स्वास्थ्य विभाग लॉन्च करने जा रहा है। रोटावैग की तरह ही इसका लगाने का शेड्यूल रहेगा। रोटा वायरस वैक्सीन की तरह ये रोटासिल वैक्सीन विकल्प मिल जाएगा। इसको लेकर जल्द स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रेनिंग करवाई जाएगी।
-डॉ. कुलदीप चौधरी, उप सिविल सर्जन