इसके साथ एनएचएम के तहत लगी तीन स्टाफ नर्स को भी हटाने के निर्देश दिए हैं। जिन्हें विभाग की तरफ से नोटिस भी जारी कर दिया गया है। उन्हें डेपुटेशन पर भेज दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक भूथनकलां पीएचसी पर डिलीवरी केस में गड़बड़ी होने को लेकर स्वास्थ्य विभाग को शिकायतें आई। विभाग ने इस मामले में जच्चा व बच्चा को खतरा बताते हुए विभाग को रिपोर्ट भेजी।
दूसरी ओर विभाग की तरफ से पीएचसी का पिछला रिकार्ड खंगाला गया तो एक क्वार्टर यानि की अप्रैल मई, जून में केवल 10 ही डिलीवरी केस पाए गए। यानि कि एक महीने में मात्र 3 केस ही निकले।
डिलीवरी कम होने के पीछे मुख्य वजह स्टाफ द्वारा केस को हैंडल न कर पाना है। इसी डर के चलते महिलाएं पीएचसी भूथनकलां में डिलीवरी करवाने से डरती थी।
जिसके चलते एमडी एनएचएम ने भूथन कलां पीएचसी पर डिलीवरी केस बंद करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पीएचसी पर तैनात अतिरिक्त तीन स्टाफ नर्सों को भी हटाया जा रहा है जिन्हें विभाग ने नियमानुसार एक महीने का नोटिस देकर डेपुटेशन पर दूसरे अस्पताल में भेज दिया है। पीएचसी अब 24 घंटे की बजाए चार बजे बंद हो जाएगी।
तीन और पीएचसी को भी दिए नोटिस
डिलीवरी केस कम होने पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से तीन और पीएचसी को भी नोटिस दिए गए हैं। इन पीएचसी में 6 से 8 के बीच डिलीवरी हो रही हैं।
विभाग के नियमानुसार 25 हजार से 30 हजार आबादी के बीच एक पीएचसी बनाया जाता है। विभाग की मानें तो पीएचसी पर कम से कम 10 डिलीवरी महीने की होनी चाहिए।
सुविधाएं बढ़ानी चाहिए, न कि सेवाएं बंद करे, ग्रामीणों ने किया विरोध
पीएचसी पर डिलीवरी केस बंद करने पर ग्रामीणों ने इसका विरोध किया है। ग्रामीण नरेन्द्र कुलडिया, सरपंच साधुराम, इंद्र ने कहा कि विभाग को सुविधा बढ़ानी चाहिए न कि बंद करनी चाहिए। सुविधा न होने के कारण महिलाओं को दूसरे अस्पताल में जाना पड़ा रहा था।
गांव से शिकायत आई थी कि स्टाफ से हैंडल नहीं हो रहा है। पीएचसी सेंटर पर डिलीवरी केस भी कम आ रहे थे। डिलीवरी केस में कोई दिक्कत न आ जाए इसलिए जनहित को देखते हुए यहां पर डिलीवरी केस बंद करने का निर्णय लिया गया है।
डा. मुनीष बंसल
कार्यकारी सीएमओ