फतेहाबाद। गांवों में कूड़े के प्रबंधन को लेकर अब पंचायत समिति व अधिकारियों ने बड़ा कदम उठाया गया है। अब शहरों की तरह जिले के पांच गांवों में भी डोर टू डोर कूड़े का उठान जल्द शुरू होगा। पांच गांवों में घर-घर से कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं संभालेंगी।
ये पहल ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से शुरू की जा रही है, जिसका उद्देश्य गांवों को स्वच्छ बनाना और महिलाओं को स्थायी आजीविका प्रदान करना है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को घरों से निकलने वाले कूड़े के बारे में विशेष प्रशिक्षण दिया है। महिलाओं को न सिर्फ कूड़ा संग्रहण के सही तरीके सिखाए गए हैं, बल्कि उन्हें कूड़ा उठाने वाली ई-रिक्शा चलाने का भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
नागपुर खंड के पांच गांवों से शुरुआत
योजना को पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। इसके लिए नागपुर खंड के पांच गांवों का चयन किया गया है, जहां पहली बार डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का काम जल्द शुरू होगा। नागपुर खंड गांव नक्टा, ढाणी ढाका, दादूपुर, हुकमावाली और नागपुर गांव का कुछ क्षेत्र शामिल है। इन गांवों में जल्द ही महिलाएं घर-घर जाकर कूड़े का संग्रहण शुरू करेंगी, जिससे गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी कम होगी और स्वच्छता का स्तर बढ़ेगा।
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घर-घर से वसूलेंगे 50 रुपये मासिक शुल्क
इस स्वच्छता सेवा को जारी रखने और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को पारिश्रमिक देने के लिए उपयोगकर्ता शुल्क भी निर्धारित किया गया है। इन गांवों में प्रत्येक घर से मासिक तौर पर 50 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह राशि कूड़ा संग्रहण कार्य में लगी महिलाओं के वेतन, वाहन के रखरखाव और अन्य परिचालन लागतों को पूरा करने में सहायक होगी। यह मॉडल सुनिश्चित करेगा कि यह स्वच्छता कार्यक्रम किसी सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके।
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एक गांव के लिए खरीदी गई एक ई-रिक्शा : बीडीपीओ
नागपुर खंड के बीडीपीओ विकास लांग्यान ने बताया कि पंचायत समिति के सहयोग से पांच गांवों में ये प्रोजेक्ट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। प्रत्येक गांव में करीब 5 महिलाएं कूड़ा उठान का काम करेंगी। वहीं एक गांव में एक ई-रिक्शा पंचायत समिति की ओर से कूड़े के उठान के लिए दिया जाएगा। एक रिक्शा पर करीब एक लाख रुपये से अधिक की लागत लगेगी। इन महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कार्रवाई जारी है। पंचायत के साथ बैठकर कूड़े के उठान के लिए प्रत्येक घर से 50 रुपये लिए जाएंगे।
महिलाओं को मिल रहा रोजगार : डीपीएम
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सतबीर कुमार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की 24 महिलाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की ओर से कूड़े को अलग-अलग (गीला और सूखा) करके संग्रह करने और उसके उचित निस्तारण की के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है। पंचायत समिति की ओर से यह अच्छी पहल की गई है।